Balaghat Fortified Rice Scam: बालाघाट में एथेनॉल प्लांट (Ethanol Plant) के नाम पर सरकारी फोर्टिफाइड चावल (Fortified Rice) की कथित करोड़ों रुपये की हेराफेरी मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। अब तक की जांच में 5,429 मीट्रिक टन सरकारी चावल की कथित हेराफेरी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आए हैं। इस मामले में पुलिस ने 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और पूरे नेटवर्क की जांच करते हुए आरोपियों की भूमिका व सरकारी चावल के उपयोग की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
Balaghat Fortified Rice Scam: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में फोर्टिफाइड सरकारी चावल (Fortified Rice) की कथित हेराफेरी से जुड़े करोड़ों रुपये के चर्चित मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। एथेनॉल प्लांट (Ethanol Plant) के नाम पर सरकारी चावल के दुरुपयोग के आरोपों के बीच पुलिस ने 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों में छिंदवाड़ा के बोरगांव स्थित एवीजे एथेनॉल प्लांट (AVJ Ethanol Plant) के मालिक पिता-पुत्र और सिवनी के नंदगोपाल राइस मिल (Rice Mill) के संचालक सोनू जैन भी शामिल हैं। फिलहाल सभी मुख्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
12.5 करोड़ रुपये के सरकारी चावल की हेराफेरी का दावा
मंगलवार को पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जांच के दौरान अब तक 5,429 मीट्रिक टन सरकारी फोर्टिफाइड चावल की कथित हेराफेरी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। सरकारी मूल्यांकन के अनुसार इस चावल की कीमत करीब 12.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस अब पूरे मामले की वित्तीय और दस्तावेजी जांच कर रही है।
6 से 8 महीने का रिकॉर्ड खंगाल रही SIT
मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (Special Investigation Team-SIT) पिछले छह से आठ महीनों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रहा है। टीम बालाघाट जिले के एफसीआई (FCI) और सीडब्ल्यूसी (CWC) गोदामों से एवीजे एथेनॉल प्लांट भेजे गए चावल की आपूर्ति, परिवहन, स्टॉक और प्राप्ति रजिस्टरों का मिलान कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी चावल का वास्तविक उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया गया।
जांच का दायरा अन्य जिलों तक बढ़ेगा
पुलिस का कहना है कि जांच केवल बालाघाट तक सीमित नहीं रहेगी। दूसरे चरण में मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से एथेनॉल उत्पादन के नाम पर भेजे गए सरकारी चावल की सप्लाई और उसके उपयोग की भी जांच की जाएगी। यदि किसी अन्य जिले में भी अनियमितता सामने आती है तो मामले में नए आरोपियों के नाम जोड़े जा सकते हैं।
अब तक चार गिरफ्तार, कई आरोपी फरार
इस मामले का खुलासा 3 जून को हुआ था, जबकि 5 जून को एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद 20 से 25 सदस्यीय SIT लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक पुलिस 20 ट्रकों को जब्त कर चुकी है और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में ट्रक चालक दुर्गेश शेंडे, एथेनॉल प्लांट प्रतिनिधि राहुल प्रताप, सुपरवाइजर राकेश श्रीवास्तव और ट्रांसपोर्टर उबेद खान शामिल हैं।
वहीं, एवीजे एथेनॉल प्लांट के मालिक पिता-पुत्र, नंदगोपाल राइस मिल के संचालक सोनू जैन समेत कई मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी तलाश में अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
संचेती राइस मिल से हुआ था मामले का खुलासा
इस कथित घोटाले की शुरुआत वारासिवनी क्षेत्र स्थित संचेती राइस मिल से हुई थी, जहां से एवीजे एथेनॉल प्लांट के लिए भेजे जा रहे फोर्टिफाइड सरकारी चावल से लदा एक ट्रक पकड़ा गया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो कई और ट्रकों का पता चला और सरकारी चावल की कथित हेराफेरी का एक बड़ा नेटवर्क सामने आने लगा।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं हो सकता और इसमें कई जिलों से सरकारी चावल की आपूर्ति तथा निजी संस्थानों के बीच संभावित गठजोड़ की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में नए तथ्य सामने आने पर एफआईआर में अतिरिक्त धाराएं और नए आरोपियों के नाम भी शामिल किए जा सकते हैं।




