प्रत्येक वर्ष जब सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस तिथि को कन्या संक्रांति कहा जाता है। इसी पावन दिन पर देशभर में Vishwakarma Jayanti 2026 अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। ब्रह्मांड के प्रथम इंजीनियर, वास्तुकार और देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा इस दिन विशेष रूप से की जाती है। कारखानों, दुकानों, औजारों, गाड़ियों और मशीनों की पूजा करके शिल्पकार व व्यापारी अपने कार्य में उन्नति और सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि झारखंड के प्रसिद्ध देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में किया था? इस निर्माण के दौरान एक ऐसी पौराणिक घटना घटी, जिसके कारण भगवान विष्णु को स्वयं मुर्गे का रूप धारण करना पड़ा।
एक ही रात में 5 मंदिरों के निर्माण का संकल्प
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं ने जंगल से घिरे देवघर स्थान पर शिवधाम स्थापित करने का निर्णय लिया। इस दिव्य कार्य का दायित्व देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा को सौंपा गया। भगवान विश्वकर्मा ने यह संकल्प लिया कि वह एक ही रात में इस पावन स्थल पर मंदिरों का निर्माण पूरा कर देंगे।
भगवान विश्वकर्मा ने अपने दिव्य कौशल से निर्माण कार्य आरंभ किया। उन्होंने सबसे पहले भोलेनाथ के भव्य मंदिर का निर्माण किया। इसके पश्चात उन्होंने क्रमबद्ध तरीके से अन्य मंदिरों को आकार दिया:
- प्रथम मंदिर: भगवान भोलेनाथ (बाबा बैद्यनाथ) का मंदिर
- द्वितीय मंदिर: माता पार्वती का मंदिर
- तृतीय मंदिर: भगवान गणेश का मंदिर
- चतुर्थ मंदिर: संध्या मंदिर
- पंचम मंदिर: स्वयं के लिए एक अत्यंत विशाल एवं भव्य मंदिर
जब देवताओं को हुई चिंता: स्वयं का मंदिर सबसे बड़ा?
चार मंदिरों का निर्माण पूरा करने के बाद, भगवान विश्वकर्मा ने पांचवें मंदिर के रूप में स्वयं के लिए एक विशाल और भव्य मंदिर बनाना शुरू किया। मान्यता है कि यह मंदिर आकार और भव्यता में भगवान भोलेनाथ के मंदिर से भी बड़ा बनने लगा था।
जब अन्य देवताओं ने यह देखा, तो वे चिंतित हो उठे। नारद मुनि ने यह सूचना भगवान भोलेनाथ और अन्य देवगणों तक पहुंचाई। देवताओं में यह चर्चा होने लगी कि यदि विश्वकर्मा जी का मंदिर महादेव के मंदिर से अधिक भव्य बन गया, तो यह सृष्टि के नियमों और मर्यादा के अनुकूल नहीं होगा।
भगवान विष्णु ने क्यों लिया मुर्गे का रूप?
निर्माण को रोकने और समय सीमा समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने एक लीला रची। चूंकि भगवान विश्वकर्मा का संकल्प केवल “एक रात” का था, इसलिए रात समाप्त होने का संकेत देना आवश्यक था।
- समय से पहले बांग देना: भगवान विष्णु ने मुर्गे का रूप धारण किया और भोर (सुबह) होने से काफी पहले ही जोर-जोर से बांग देना शुरू कर दिया।
- संकल्प की समाप्ति: मुर्गे की बांग सुनते ही भगवान विश्वकर्मा को लगा कि प्रातः काल हो चुका है और रात्रि का समय समाप्त हो गया है।
- अधूरा रहा निर्माण: रात समाप्त मानने के कारण विश्वकर्मा जी ने अपना काम तुरंत रोक दिया। इसके परिणामस्वरूप वह पांचवां मंदिर अधूरा ही रह गया।
आज इस अधूरे मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि जब भोलेनाथ को पता चला कि यह मंदिर उनके मंदिर से ऊंचा हो रहा था, तो उन्होंने अपने अंगूठे से दबाकर उसकी ऊंचाई कम कर दी थी।
Vishwakarma Puja Shubh Muhurat 2026: शुभ मुहूर्त और राहुकाल
Vishwakarma Jayanti 2026 पर पूजा-अर्चना के लिए शुभ समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पूजा के लिए शुभ समय
| मुहूर्त का प्रकार | समय (Time) |
|---|---|
| कन्या संक्रांति पुण्य काल | सुबह 07:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक |
| सुबह का मुहूर्त | सुबह 07:58 बजे से सुबह 10:43 बजे तक |
| दोपहर का मुहूर्त (चर-लाभ-अमृत) | सुबह 10:12 बजे से दोपहर 02:47 बजे तक |
| अमृत चौघड़िया | दोपहर 12:16 बजे से दोपहर 01:48 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक |
| शाम का मुहूर्त | शाम 04:52 बजे से शाम 06:24 बजे तक |
राहुकाल चेतावनी: दोपहर 01:48 बजे से दोपहर 03:20 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार की नई पूजा या औजारों का पूजन न करें।
भगवान विश्वकर्मा का निर्माण और तकनीकी महत्व
शास्त्रों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा केवल मंदिरों के ही नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के वास्तुकला के जनक हैं। उन्होंने देवताओं के लिए कई अस्त्र-शस्त्रों और अलौकिक नगरों का निर्माण किया:
- सुदर्शन चक्र: भगवान विष्णु का अचूक अस्त्र।
- शिवजी का त्रिशूल: महादेव का अस्त्र।
- पुष्पक विमान: रावण और देवताओं द्वारा प्रयुक्त दिव्य विमान।
- दिव्य नगर: सत्ययुग में स्वर्ग लोक, त्रेतायुग में सोने की लंका, द्वापर में द्वारका नगरी और इन्द्रप्रस्थ का निर्माण।
विश्वकर्मा जयंती के दिन कारखानों, मशीनों, कंप्यूटरों और शिल्प औजारों की सफाई करके पूजा करने से व्यापार में वृद्धि, रोजगार में सफलता और तकनीकी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: Vishwakarma Jayanti 2026 में कब मनाई जा रही है?
Ans: Vishwakarma Jayanti प्रत्येक वर्ष सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश (कन्या संक्रांति) पर मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 17 सितंबर को मनाया जा रहा है, जिस दिन सूर्य देव कन्या राशि में गोचर करते हैं।
Q2: भगवान विष्णु ने मुर्गे का रूप क्यों लिया था?
Ans: भगवान विश्वकर्मा एक ही रात में भोलेनाथ के मंदिर से बड़ा स्वयं का मंदिर बना रहे थे। समय सीमा समाप्त करने और भोर का भ्रम पैदा करने के लिए भगवान विष्णु ने मुर्गा बनकर बांग दी, जिससे निर्माण कार्य रुक गया।
Q3: एक रात में विश्वकर्मा जी ने किन 5 मंदिरों का निर्माण किया था?
Ans: विश्वकर्मा जी ने देवघर में एक ही रात में सबसे पहले भोलेनाथ का मंदिर बनाया। इसके बाद माता पार्वती, भगवान गणेश, संध्या मंदिर और अंत में अधूरा रह गया लक्ष्मी नारायण मंदिर बनाया।
Q4: विश्वकर्मा पूजा के दिन किन चीजों की पूजा की जाती है?
Ans: इस दिन भगवान विश्वकर्मा के साथ-साथ सभी प्रकार की मशीनों, कारखानों, औजारों, गाड़ियों, तकनीकी उपकरणों और निर्माण कार्यों से जुड़ी वस्तुओं की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
Q5: Vishwakarma Puja 2026 का सबसे उत्तम मुहूर्त कौन सा है?
Ans: पूजा का सबसे मुख्य और उत्तम समय कन्या संक्रांति पुण्य काल (सुबह 07:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक) और अभिजित मुहूर्त (सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक) है।
Conclusion
Vishwakarma Jayanti 2026 केवल औजारों और मशीनों के पूजन का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी प्राचीन वास्तुकला, तकनीक और निष्ठा का सम्मान करने का अवसर है। देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम और लक्ष्मी नारायण मंदिर से जुड़ी यह पौराणिक कथा हमें सिखाती है कि भक्ति और निर्माण में अहंकार के स्थान पर संतुलन और मर्यादा का होना आवश्यक है। इस शुभ मुहूर्त में भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें और अपने कार्यक्षेत्र में तरक्की का आशीर्वाद प्राप्त करें।




