हिंदू धर्म में हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2026) का व्रत अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के लिए सबसे कठिन और पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं बिना जल ग्रहण किए निर्जला व्रत रखती हैं। पूरे दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद शाम या रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत की प्रक्रिया पूर्ण की जाती है।
हालांकि, इस बार हरतालिका तीज 2026 पर एक विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। इस दिन सुबह तो तृतीया तिथि रहेगी, लेकिन शाम के समय चंद्र दर्शन के दौरान चतुर्थी तिथि लग जाएगी। शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के चंद्रमा के दर्शन करना वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे कलंक दोष लगता है। ऐसे में महिलाओं के मन में यह संशय है कि चतुर्थी के साए में चंद्र दर्शन और पूजा कैसे की जाए।
हरतालिका तीज पर तृतीया और चतुर्थी का संयोग
शास्त्रों में तिथियों के उतार-चढ़ाव और उदयातिथि का विशेष महत्व होता है। पंचांग गणना के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत तृतीया तिथि से शुरू होता है। 2026 में तृतीया तिथि सुबह के समय रहेगी, जिसके कारण व्रत का संकल्प और सुबह की पूजा तृतीया में ही संपन्न होगी।
लेकिन शाम ढलते ही चतुर्थी तिथि प्रवेश कर जाएगी। चतुर्थी तिथि में चंद्रमा का उदय होने के कारण चंद्र अर्घ्य का समय चतुर्थी के प्रभाव में आ जाएगा। शास्त्रों में भाद्रपद चतुर्थी का चंद्रमा देखना शुभ नहीं माना गया है, इसलिए इस दिन पूजा करते समय शास्त्रों द्वारा बताए गए विशेष नियमों (Hartalika teej 2026 moon puja niyam) का पालन करना अनिवार्य हो जाता है।
भाद्रपद चतुर्थी पर क्यों वर्जित माना जाता है चंद्र दर्शन?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान श्री गणेश जी ने चंद्रमा को उनके रूप और सुंदरता के घमंड के कारण श्राप दिया था। गणेश जी ने श्राप दिया था कि जो भी व्यक्ति इस तिथि को चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर कोई न कोई झूठा आरोप या कलंक लगेगा।
इस कथा का उल्लेख श्रीमद्भागवत पुराण में भी मिलता है। माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने भी गलती से भाद्रपद चतुर्थी के चंद्रमा के दर्शन कर लिए थे, जिसके परिणामस्वरूप उन पर स्यमंतक मणि चोरी करने का झूठा कलंक लगा था। यही कारण है कि इस तिथि पर सीधा चंद्र दर्शन करना वर्जित माना जाता है।
Hartalika Teej Chandrama Ke Darshan Kaise Karein: चंद्र दोष से बचने के नियम
यदि आप हरतालिका तीज का व्रत रख रही हैं और शाम के समय चतुर्थी तिथि लगी हुई है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। शास्त्रों में इसके लिए विशेष उपाय और अर्घ्य की विधि बताई गई है, जिससे चंद्र दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है:
| क्रम | नियम व उपाय | विवरण / शास्त्रीय विधि |
|---|---|---|
| 1 | सीधा दर्शन न करें | चंद्रमा की ओर सीधे आंखें उठाकर न देखें। आंखें झुकाकर या जल में छाया देखकर अर्घ्य दें। |
| 2 | हाथ में सामग्री रखें | अर्घ्य देते समय हाथ में फल, फूल, दूध, दही या अक्षत अवश्य रखें। |
| 3 | छलनी का प्रयोग | चंद्र दर्शन करते समय छलनी या वस्त्र के माध्यम से चंद्रमा को देखें। |
| 4 | गणेश वंदना | चंद्रमा को अर्घ्य देने से पूर्व भगवान गणेश जी का ध्यान करें और क्षमा याचना करें। |
अर्घ्य देने की सही विधि:
- तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लें।
- जल में थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत (अखंडित चावल), रोली और सफेद फूल मिलाएं।
- अपने हाथों में फल या मिठाई रखकर चंद्रमा की दिशा में मुख करें।
- नजरें नीचे रखते हुए धीरे-धीरे जल की धारा से चंद्रमा को अर्घ्य दें।
- “ॐ सों सोमाय नमः” या “ॐ चं चंद्रमसे नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें।
हरतालिका तीज पर चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य देने का महत्व
ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में चंद्र देव को मन, शीतलता, मानसिक शांति और समृद्धि का कारक ग्रह माना गया है। हालांकि हरतालिका तीज का मुख्य पूजन भगवान शिव और माता पार्वती का होता है, लेकिन शाम के समय चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से व्रत की संपूर्णता मानी जाती है।
- शीतलता और शांति: चंद्र देव की कृपा से दांपत्य जीवन में मधुरता और शीतलता बनी रहती है।
- अखंड सौभाग्य: सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
- पारिवारिक समृद्धि: परिवार में स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का वास होता है।
Hartalika Teej Moon Rise Timing 2026 और शाम की पूजा विधि
हरतालिका तीज पर शाम की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। चंद्रोदय का समय आपके स्थानीय शहर के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है, लेकिन सामान्यतः शाम को चंद्रोदय के बाद ही अर्घ्य देने की परंपरा है।
शाम की पूजा के मुख्य चरण:
- प्रदोष काल में पुनः स्नान करके स्वच्छ या नए वस्त्र (हरियाली या लाल रंग के) धारण करें।
- भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मिट्टी की मूर्तियों के सामने दीपक जलाएं।
- मां पार्वती को सुहाग की 16 सामग्रियां (सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी आदि) अर्पित करें।
- हरतालिका तीज की कथा सुनें या पढ़ें।
- चंद्रोदय के बाद बताए गए नियमों का पालन करते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दें और आरती करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या हरतालिका तीज 2026 में चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन करना चाहिए?
हरतालिका तीज पर यदि शाम को चतुर्थी तिथि लग रही हो, तो सीधा चंद्र दर्शन करने से बचना चाहिए। भाद्रपद चतुर्थी का चंद्रमा देखने से कलंक दोष लगता है। इसलिए हाथ में फल या दूध रखकर अथवा जल की धारा या छलनी के माध्यम से अर्घ्य देना चाहिए।
हरतालिका तीज पर चंद्र दोष से बचने के लिए क्या उपाय करें?
चंद्र दोष से बचने के लिए अर्घ्य देते समय हाथ में फल, दही या अनाज रखें। नजरें चंद्रमा पर सीधे टिकाने के बजाय जल के पात्र पर रखें। अर्घ्य देने से पहले भगवान गणेश जी का स्मरण करें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
हरतालिका तीज का व्रत पारण कब और कैसे करना चाहिए?
हरतालिका तीज के व्रत का पारण अगले दिन यानी चतुर्थी तिथि की सुबह पूजा-पाठ के बाद किया जाता है। सुबह उठकर स्नान करें, शिव-पार्वती की अंतिम पूजा करें, भोग लगाएं और ब्राह्मण या सुहागिन महिला को दान देने के बाद ही जल या प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।
हरतालिका तीज की शाम की पूजा का सही समय क्या है?
हरतालिका तीज की शाम की पूजा का सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद का ‘प्रदोष काल’ माना जाता है। इस समय शिव-पार्वती की आरती और कथा करने के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को विधिपूर्वक अर्घ्य देना शुभ फलदायी माना गया है।
हरतालिका तीज 2026 पर भले ही शाम के समय चतुर्थी तिथि का साया रहेगा, लेकिन भक्ति और नियमों के सही पालन से आप किसी भी दोष से बच सकती हैं। शास्त्रों में बताए अनुसार हाथों में फल या जल रखकर तथा गणेश जी का ध्यान करते हुए अर्घ्य देने से चंद्र दोष का प्रभाव खत्म हो जाता है और माता पार्वती तथा भगवान शिव का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है।




