ब्रिटेन की एक महिला के दिमाग में 38 परजीवी मिलने का मामला सामने आने के बाद Neurocysticercosis नामक बीमारी एक बार फिर चर्चा में देखी जा रहीहै। जानकारी के अनुसार इस यूके की महिला भारत यात्रा के दौरान बीमार हुई थी लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल यात्रा के आधार पर संक्रमण की जगह नहीं तय की जा सकती तो चलिए हम समझते हैं कि यह बीमारी है क्या? कैसे फैलती हैं और इससे आप कैसे बचाव कर सकते हैं।

Neurocysticercosis क्या होता है?
यह एक तरह का परजीवी संक्रमण होता है जो की टेनियन सोliym यानी पार्क टेपवर्म के अंडों के शरीर में पहुंचने से होता है। तो वहां गांठ जैसी कोई संरचना हो जाती है। यह स्थिति ही Neurocysticercosis नामक बीमारी कहलाती है या बीमारी दुनिया के कहीं जगह में देखने मिलती है खास उन जगह जहां साफ सफाई और स्वच्छता की कमी होती है।
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Neurocysticercosis कैसे फैलती है?
कई सारे ऐसे लोगों को लगता है कि यह बीमारी केवल पोर्क खाने से होती है। लेकिन यह पूरी तरह से सही नहीं है असल में संक्रमण तब होता है जब टेप वर्ग में अंडे दूषित भोजन पानी या गंदे हाथों के जरिए शरीर में चले जाते हैं। खराब स्वच्छता और हाथ ना धोने जैसी गंदी आदतों से संक्रमण का खतरा और भी बढ़ जाता है इसलिए साफ सफाई का ध्यान रखना सबसे जरूरी होता है।
इसके लक्षण क्या हो सकते हैं?
Neurocysticercosis बीमारी के लक्षण हर मरीज में अलग देखने को मिलते हैं कई बार इंफेक्शन होने के महीना या सालों तक कोई परेशानी नहीं पता चलती है। जब सिस्टम दिमाग पर असर डालने लगता है तब बार-बार दौरे पड़ते हैं तेज सिर दर्द आता है चक्कर आने लगता है कमजोरी, याद में कमी आदि जैसी दिक्कतें मिलने को मिलती है। ऐसे लक्षण तुरंत दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच करनी चाहिए।
इसके इलाज और बचाव कैसे करें?
Neurocysticercosis का इलाज मरीज की स्थिति के अनुसार ही किया जाता है। डॉक्टर दावों के जरिए परजीवियों को खत्म करने और सूजन को कम करने के साथ-साथ दौरे को नियंत्रित करने की भी कोशिश करते हैं। कुछ गंभीर मामलों में ज्यादा चिकित्सा व्यवस्था की जरूरत भी पड़ सकती है। इसलिए बचाव के लिए हमेशा साफ पानी भोजन बनाने और खाने से पहले हाथ को अच्छी तरह धोना जरूरी होता है।
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भारत यात्रा से जोड़कर देखना कितना सही होगा?
ब्रिटेन की महिला के मामले में भारत यात्रा का जिक्र किया गया है लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं देखने को मिला है। इसलिए केवल यात्रा के आधार पर किसी एक देश को संक्रमण का कारण मानना सही नहीं होगा।




