Ujjain Namo Ghat: उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर वाराणसी की तर्ज पर नमो घाट विकसित करने की तैयारी है। यहां भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप की 182 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। घाट पर हर शाम शिप्रा आरती और पूजा-अर्चना की व्यवस्था होगी। यूनिटी मॉल, घाट और विशाल प्रतिमा को एक साथ विकसित कर इस क्षेत्र को उज्जैन के नए धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में तैयार करने की योजना है। परियोजना को सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
Ujjain Namo Ghat: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में आने वाले समय में एक नया धार्मिक और पर्यटन केंद्र (Religious & Tourism Hub) विकसित होने जा रहा है। वाराणसी की तर्ज पर क्षिप्रा नदी के किनारे नमो घाट (Namo Ghat) बनाया जाएगा, जहां भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप की 182 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। प्रस्तावित परियोजना को लेकर उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
क्षिप्रा तट पर बनेगा नमो घाट
उज्जैन विकास प्राधिकरण के मुताबिक हरिफाटक बायपास के पीछे, यूनिटी मॉल के पास क्षिप्रा नदी के किनारे इस परियोजना को विकसित किया जाएगा। यहां भगवान कृष्ण की विशाल प्रतिमा के साथ आधुनिक सुविधाओं से युक्त घाट भी तैयार किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य इस क्षेत्र को धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ पर्यटन, सांस्कृतिक गतिविधियों और आध्यात्मिक अनुभव (Spiritual Tourism) का प्रमुख केंद्र बनाना है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना को अगले करीब दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
182 फीट ऊंची होगी भगवान कृष्ण की प्रतिमा
परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान कृष्ण की 182 फीट ऊंची प्रतिमा होगी। यह प्रतिमा ब्रॉन्ज (Bronze) से तैयार की जाएगी, जबकि इसके भीतर का मुख्य ढांचा स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel Structure) का होगा। इतनी ऊंचाई वाली प्रतिमा को मौसम, हवा और अन्य तकनीकी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा। इसके स्ट्रक्चरल डिजाइन (Structural Design) के लिए ऐसे विशेषज्ञ इंजीनियर की मदद ली जा रही है, जो देश की प्रमुख विशाल प्रतिमाओं की डिजाइन प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं।
हर शाम होगी शिप्रा आरती
नमो घाट को केवल प्रतिमा स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा। यहां नियमित रूप से शिप्रा आरती (Shipra Aarti) और पूजा-अर्चना की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप के दर्शन के साथ क्षिप्रा नदी की आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा। शाम के समय घाट पर होने वाली आरती इस पूरे क्षेत्र को विशेष Spiritual Experience देने वाला केंद्र बना सकती है।
यूनिटी मॉल के साथ होगा क्षेत्र का विकास
प्रस्तावित नमो घाट और कृष्ण प्रतिमा के आसपास पहले से ही बड़े स्तर पर विकास कार्यों की योजना है। इसी क्षेत्र में करीब 260 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल (Unity Mall) का निर्माण भी प्रस्तावित है। मॉल में देश और विदेश के उत्पादों के लिए स्थान, कैफेटेरिया, होटल, कॉन्फ्रेंस हॉल सहित कई सुविधाएं विकसित की जानी हैं। ऐसे में घाट, विशाल प्रतिमा और मॉल को एक साथ विकसित करने की योजना से यह इलाका उज्जैन के नए Tourism Destination के रूप में उभर सकता है।
सिंहस्थ 2028 से पहले तैयार करने पर जोर
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए शहर के धार्मिक और पर्यटन ढांचे को विस्तार देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में नए घाट, धार्मिक स्थलों और पर्यटक सुविधाओं को विकसित करने की योजनाएं सामने आ रही हैं। नमो घाट और भगवान कृष्ण की विशाल प्रतिमा भी इसी Tourism Development Plan का हिस्सा मानी जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां धार्मिक आयोजनों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है।
महाकाल लोक के बाद नया विजुअल लैंडमार्क
उज्जैन पहले से ही महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक के कारण देश-दुनिया में धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में क्षिप्रा तट पर बनने वाली 182 फीट ऊंची कृष्ण प्रतिमा शहर के लिए एक नया Visual Landmark बन सकती है। प्रदेश में ओंकारेश्वर की 108 फीट ऊंची आदि शंकराचार्य प्रतिमा, छिंदवाड़ा के रामेश्वरधाम में 81 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और जबलपुर की कचनार सिटी में 76 फीट ऊंची शिव प्रतिमा प्रमुख विशाल प्रतिमाओं में शामिल हैं। इनके मुकाबले उज्जैन की प्रस्तावित 182 फीट ऊंची प्रतिमा अपने आकार के कारण खास आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
शिव नगरी में विष्णु परंपरा को मिलेगा नया विस्तार
यूडीए अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि महाकाल की नगरी उज्जैन में भगवान शिव की परंपरा के साथ भगवान विष्णु की धार्मिक परंपरा को भी व्यापक रूप देने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण है। नमो घाट, भगवान कृष्ण की विशाल प्रतिमा, आरती स्थल और यूनिटी मॉल को एक साथ विकसित किए जाने से हरिफाटक बायपास के पीछे का क्षेत्र आने वाले वर्षों में उज्जैन के प्रमुख Religious Tourism Circuit का हिस्सा बन सकता है।
दो साल में पूरा करने का लक्ष्य
उज्जैन विकास प्राधिकरण ने पूरे प्रोजेक्ट को करीब दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना के आकार और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए प्रतिमा निर्माण के साथ घाट और आसपास के Infrastructure Development पर भी चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। यदि योजना तय समयसीमा के अनुसार पूरी होती है, तो सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए क्षिप्रा तट पर एक नया धार्मिक एवं सांस्कृतिक आकर्षण तैयार हो सकता है।




