Kanha Wild Buffalo Restoration: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस ऐतिहासिक मौके पर कहा, “150 साल बाद मध्यप्रदेश की धरती पर कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बार फिर जंगली भैंस (Wild Buffalo) लौट आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वे सभी वन्य प्राणी, जो एक-एक करके विलुप्त हो गए थे या यहां से चले गए थे, अब मध्यप्रदेश के जंगलों में वापस आ रहे हैं।”
Kanha Wild Buffalo Restoration: लगभग डेढ़ सदी बाद मध्यप्रदेश के जंगलों में जंगली भैंसों (Wild Water Buffalo) की वापसी हो गई है। असम के प्रसिद्ध काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) से लाई गई चार जंगली भैंसों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले के सूपखार-टोपला क्षेत्र (Supkhar-Topla area) में कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) के प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया। यह ‘वाइल्ड-टू-वाइल्ड’ ट्रांसलोकेशन (Wild-to-Wild Translocation) देश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक यादगार प्रयोग माना जा रहा है।वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन चार भैंसों में तीन मादाएं और एक नर शामिल हैं। सभी किशोरावस्था से आगे की उम्र की हैं, जिससे उनका नया पर्यावरण में अनुकूलन (Adaptation) और प्रजनन (Breeding) की संभावनाएं बेहतर बताई जा रही हैं। शुरुआती दिनों में विशेषज्ञों और वनकर्मियों की टीम इनकी निरंतर निगरानी करेगी।
एक सदी पुरानी कमी पूरी होने की शुरुआत
मध्यप्रदेश के जंगलों से जंगली भैंस प्रजाति करीब 150 साल पहले विलुप्त हो चुकी थी। कान्हा क्षेत्र में आखिरी बार 1970 के दशक के अंत तक (लगभग 1979) इनकी मौजूदगी दर्ज की गई थी। अत्यधिक शिकार, मानव हस्तक्षेप और घास के मैदानों के क्षरण ने इस मजबूत प्रजाति को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर कहा कि चीता पुनर्स्थापना (Cheetah Reintroduction) के बाद जैव-विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) का यह अगला बड़ा कदम है। उन्होंने जोर दिया कि “जो प्रजातियां कभी हमारे जंगलों का अभिन्न हिस्सा थीं, उनकी वापसी से प्रकृति का संतुलन खुद-ब-खुद मजबूत होता है।”
कान्हा क्यों चुना गया? वैज्ञानिक आधार पर फैसला
भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून (Wildlife Institute of India, Dehradun) के अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के लिए सबसे उपयुक्त habitat पाया गया। यहां उपलब्ध विस्तृत घासभूमि (Grasslands), साल भर पानी की उपलब्धता और कम मानव दखल इस प्रजाति के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगली भैंसों की चराई से घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र (Grassland Ecosystem) का प्राकृतिक चक्र बेहतर तरीके से चलेगा, जो अन्य वन्यजीवों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।
भविष्य की योजना: 50 भैंसों का फाउंडर पॉपुलेशन
यह केवल शुरुआत है। अधिकारियों के मुताबिक, कुल 50 जंगली भैंसों को फाउंडर पॉपुलेशन (Founder Population) के रूप में कान्हा लाने की योजना है। पहले चरण में इस सीजन में आठ भैंसों को स्थानांतरित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है, जिसमें काजीरंगा के अनुभवी पशु चिकित्सकों की भूमिका अहम रही है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
जंगली भैंसों की मौजूदगी कान्हा के पर्यटन को नई दिशा देगी। टाइगर सफारी के साथ-साथ अब पर्यटक इन दुर्लभ Asian Wild Buffalo को देखने के लिए आकर्षित होंगे। इससे स्थानीय गाइड, होटल उद्योग, परिवहन और अन्य रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की उम्मीद है।
एमपी-असम के बीच वन्यजीव सहयोग का नया मॉडल
इस परियोजना ने मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीव संरक्षण में नया सहयोग शुरू किया है। जंगली भैंसों के बाद असम से गैंडों (Rhinos) के दो जोड़े भोपाल के वन विहार में लाए जाने की योजना है। बदले में मध्यप्रदेश असम को बाघ (Tigers) और मगरमच्छ (Crocodiles) उपलब्ध कराएगा। मुख्यमंत्री ने इसे भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति में निवेश बताया। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए वाइल्ड बफेलो रीइंट्रोडक्शन (Wild Buffalo Reintroduction) का मिसाल बनेगा।




