हरिहरण के सुरों की कहानी क्यों है इतनी सुहानी !आइए जानते हैं

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Happy Birthday Hariharan:आज हम बात कर रहे हैं हरिहरण अनंत सुब्रमणि की जिन्हें हम सब हरिहरण कहते हैं,आप एक पार्श्व गायक होने के साथ साथ , भजन और ग़ज़ल गायक भी हैं और हिंदी के अलावा तमिल ,तेलुगु ,मलयालम , कन्नड़, मराठी , सिंहली , भोजपुरी , उड़िया , बंगाली , संस्कृत , गुजराती और अंग्रेजी सहित 10 भाषाओं में 15,000 से अधिक उल्लेखनीय गाने गा चुके हैं यही नहीं वो भारतीय फ्यूजन संगीत के अग्रदूतों में से एक हैं।

आपको बता दें कि बॉलीवुड और टॉलीवुड के दिग्गज सिंगर माने जाने वाले हरिहरन आज अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं। मख़मली आवाज़ के मालिक हरिहरन के कुछ सुपरहिट और यादगार गानों की बात करें तो हमें याद आते हैं – ‘बाहों के दरमियाँ ‘, ‘तू ही रे’, ‘रोजा जानेमन’ ,’झोका हवा का आज भी’ और ‘छोड़ आए हम’ । हरिहरन एक सेट ग़ज़ल सिंगर भी हैं और क़रीब 500 से ज़्यादा तमिल गाने और 200 से ज़्यादा हिंदी गाने गए चुके हैं।

2004 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था और वह दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रहे हैं। हरिहरन ने लेसले लुईस के साथ मिलकर दो दो मेंबर का बैंड ‘कोलोनियल कज़िन्स’ बनाया। उन्होंने कई निजी संगीत एल्बम बनाए हैं और तमिल और हिंदी में कुछ फीचर फिल्मों के लिए संगीत भी दिया है। 2023 में, रिकॉर्ड की गई हरिहरन और दिवंगत गुलशन कुमार की ‘हनुमान चालीसा ‘ने यूट्यूब पर 3 बिलियन व्यूज़ का आंकड़ा पार कर लिया , ऐसा करने वाला ये दुनिया का पहला भक्ति गीत बन गया था।

विरासत में मिला संगीत :

हरिहरन 3 अप्रैल 1955 को शास्त्रीय संगीतकार एच. ए. एस. मणि और अलामेलु मणि के घर पैदा हुए , एच. ए. एस. मणि – जिन्हें प्यार से चेल्लामणि कहा जाता था उन्होंने मुंबई में कई कर्नाटक शैली के गायकों को तैयार किया था ,उनकी मां अलामेलु मणि का भी कर्नाटक गायकी में एक लंबा करियर रहा है उन्हें प्रतिष्ठित शिक्षक, और 2019 में संगीता प्रचार्य की उपाधि से सम्मानित किया गया तो हरिहरन की गायकी तो बेमिसाल होनी ही थी।

शो जीतने के बाद भाए जयदेव को :-

अपने करियर की शुरुआत में, हरिहरन ने कॉन्सर्ट सर्किट किया और टीवी पर भी परफॉर्म किया। उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों जैसे ‘जुनून’ के लिए गाना गाया। 1977 में, “अखिल भारतीय सुर सिंगार प्रतियोगिता” में शीर्ष पुरस्कार जीता और दिवंगत संगीत निर्देशक जयदेव ने तुरंत उन्हें अपनी आने वाली 1978 की हिंदी फिल्म ‘गमन’ में गाने के लिए साइन कर लिया। उस फिल्म में उनका पहला गाना “अजीब सा नेहा मुझ पर गुज़र गया यारों” इतना हिट हुआ कि उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य फिल्म पुरस्कार के साथ-साथ राष्ट्रीय पुरस्कार नामांकन भी मिला।

ए. आर. रहमान का साथ :-

ए. हरिहरन ने 1992 में तमिल फिल्मों की दुनिया में प्रवेश किया था और तबसे रहमान के सबसे भरोसेमंद गायकों में से एक रहे हैं जिसकी वजह से एक लंबी फेहरिस्त है रहमान के लिए उनके गए गानों की फिल्मों की ,जिनमें ,मुथु , मिनसारा कनावु , जीन्स , इंडियन , मुधलवन , ताल , रंगीला , इंदिरा , इरुवर , अंबे अरुयिरे , कंगालाल कैथू सेई शामिल हैं। तो दूसरी तरफ शिवाजी , अलाईपायुथे , कन्नथिल मुथामित्तल , गुरु , एंथिरन जैसी फिल्में काफ़ी लोकप्रिय रहीं। उन्होंने इंडो पोलिश फिल्म नो मीन्स नो के लिए संगीत तैयार किया तो 1998 में, हरिहरन ने अनु मलिक के संगीत निर्देशन में हिंदी फिल्म बॉर्डर के गीत “मेरे दुश्मन मेरे भाई” के भावपूर्ण गायन के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता इसके बाद साल 2009 में अजय अतुल की धुन पर तैयार जोगवा के मराठी गीत “जीव रंगला” के लिए एक और राष्ट्रीय पुरस्कार मिला ।

अभिनय भी किया :-

हरिहरन ने तमिल फिल्म , पावर ऑफ वूमेन (2005)और बॉयज़ में अभिनय का जलवा भी बिखेरा है, और साथ ही मलयालम फिल्म ‘मिलेनियम स्टार्स’ में कैमियो भूमिकाएँ निभाई हैं, आज हरिहरन के नाम तीस से अधिक एल्बम हैं। अपने शुरुआती करियर में, उन्होंने कई सफल ग़ज़ल एल्बम बनाए, जिनमें से ज़्यादातर गीतों को उन्होंने खुद लिखा। हरिहरन के पहले ग़ज़ल एल्बमों में से एक आशा भोंसले के साथ आबशार-ए-ग़ज़ल था , जो बिक्री में स्वर्णिम साबित हुआ। उनका एक और उत्कृष्ट ग़ज़ल एल्बम ‘गुलफ़ाम’ था , जिसने न केवल बिक्री में डबल प्लैटिनम हासिल किया, बल्कि 1995 में हरिहरन को वर्ष के सर्वश्रेष्ठ एल्बम के लिए दिवा पुरस्कार भी दिलाया।

कुछ ख़ास एल्बम :-

हरिहरन के कुछ और ख़ास ग़ज़ल एल्बम हैं हाजिर (1992) , जश्न (1996), हल्का नशा (1996) , पैग़ाम (1997), काश (2000), और लाहौर के रंग हरि के संग (2005)। उनकी लाइव कॉन्सर्ट रिकॉर्डिंग, हरिहरन इन कॉन्सर्ट (1990), सप्तऋषि (1996) और स्वर उत्सव (2001) बेहद सफल रहीं। उनका ग़ज़ल एल्बम लफ़्ज़… (2008) भी काफी लोकप्रिय रहा। हरिहरन ने तबला वादक ज़ाकिर हुसैन के साथ उनके एल्बम हाज़िर में काम किया और उनके एल्बम लाहौर के रंग हरि के संग ने भारत के अंदर और बाहर खूब समीक्षा और आलोचनात्मक प्रशंसा हासिल की। फिल्म ‘रोजा’ के लिए तमिल फिल्म संगीत में अपना पहला गाना “थमिझा थमिझा” गाने के लिए चुने जाने से पहले ही ए. आर. रहमान उनकी ग़ज़लों के दीवाने हो चुके थे ।


आपके बैंड के अगले एल्बम द वे वी डू इट (1998) और आत्मा (2001) थे जिन्हें काफी नोटिस किया गया। कोलोनियल कजिन्स ने यूनिवर्सल लेबल के तहत 29 अक्टूबर 2012 को अपना चौथा स्टूडियो एल्बम ” वन्स मोर ” जारी किया। 2009 की तमिल फिल्म मोढ़ी विलायडु का स्कोर और साउंडट्रैक कोलोनियल कजिन्स द्वारा रचित था ये भी बता दें कि उन्होंने 2010 की तमिल फिल्म ‘चिक्कू बुक्कू’ के गीत भी लिखे थे।

सम्मान और सुरों की उड़ान :-

2004 में उन्हें संगीत में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पद्म श्री और येसुदास पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
हरिहरन ने “बोलो बोलो” नाम के ट्रैक के लिए पाकिस्तानी बैंड स्ट्रिंग्स में अपना सहयोग दिया तो वहीं दलेर मेहंदी के साथ डेस्टिनी नाम का एल्बम बनाया और अपने काफी सफल एल्बम काश के साथ “उर्दू ब्लूज़” शब्दावली गढ़ी, जिसमें ताल वादक आनंदन शिवमणि , तबले पर उस्ताद राशिद मुस्तफा, सितार पर उस्ताद लियाकत अली खान और सारंगी पर उस्ताद सुल्तान खान जैसे संगीतकार शामिल थे ।
3 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह में उन्होंने स्वागतम गीत पेश करके तो उन्होंनें हर आयु वर्ग के लोगों को अपना दीवाना बना लिया फिर नए गानों में वो ‘नैना कमाल ‘गीत लेकर आए जिसने श्रोताओं को अपनी ओर खींच लिया।

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