किसान पंचायत। किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 342वीं किसान पंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय कार्यालय सचिव भागवत परिहार के द्वारा जारी विज्ञप्ति में जानकारी दी गई है कि किसान पंचायत में विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं ने सी-2$50 प्रतिशत फार्मूले के अनुसार एमएसपी की कानूनी गारंटी एवं सरकारी खरीद सुनिश्चित करने, 20,000 करोड़ के कथित एफसीआई साइलो घोटाले, नर्मदा घाटी, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, पंजाब और हरियाणा के किसानों-मजदूरों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा किए है।
इन बिदुओं पर भी चर्चा
किसान पंचायत में राष्ट्रीय हितों को प्रभावित करने वाले मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विरोध, न्यूनतम मजदूरी, रोजगार का अधिकार, व्यापक कर्जमाफी, चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) एवं वी.बी. ग्रामजी अधिनियम 2025 की वापसी, बिजली के निजीकरण, बीज विधेयक के विरोध तथा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 (एलएआरआर एक्ट) के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर भी विचार व्यक्त किए गए।
किसानों की बढ़ रही चुनौतियां
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए डॉ. सुनीलम ने कहा कि आजादी के 79 वर्ष बाद भी किसानों की चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। सभी सरकारों ने किसानों के कल्याण के दावे किए, लेकिन खेती लगातार घाटे का सौदा बनती गई। कृषि लागत और महंगाई में जिस अनुपात में वृद्धि हुई, उस अनुपात में कृषि उत्पादों के दाम नहीं बढ़े। परिणामस्वरूप किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबता गया। इसलिए किसानों की कर्जमुक्ति, एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसान पेंशन और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे संयुक्त किसान मोर्चा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बन गए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने, भंडारण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने, बीज विधेयक तथा बिजली विधेयक जैसे कदमों से किसानों का संकट और गहरा गया है। उन्होंने बताया कि वे महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित कर्जमाफी का लाभ किसानों तक नहीं पहुंचने के विरोध में विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में पंढरपुर में चल रहे अनशन में शामिल होने पंढरपुर पहुंचे हैं।
स्वामीनाथन आयोग के तहत हो खरीदी
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि यदि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप खरीदी हो तो गेहूं 3500 तथा डॉलर चना 10,000 प्रति क्विंटल तक बिक सकता है। उन्होंने कहा कि किसान जैविक खेती के पक्ष में हैं, लेकिन जैविक उत्पादों की खरीद की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने नर्मदा नदी के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारी भी दूषित पानी से सिंचित फसलों को जैविक प्रमाणन नही दे पा रहे हैं। इस दौरान किसान पंचायत के अन्य प्रतिनिधियों ने भी अपनी बाते रखी है।
आयोजन: 342वीं मासिक किसान पंचायत आमला, मध्य प्रदेश में आयोजित की गई।
अध्यक्षता: यह आयोजन समिति के अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ सुनीलम के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
प्रमुख मुद्दे: पंचायत में किसानों के विभिन्न मुद्दों जैसे उपज का सही मूल्य, सरकारी खरीद केंद्रों की व्यवस्था और किसानों के हितों से जुड़े मामलों पर प्रमुख रूप से आवाज उठाई गई।
पृष्ठभूमि: यह संगठन मध्य प्रदेश के मुलताई गोलीकांड के बाद से सक्रिय हुआ था। संगठन की हर माह पंचायत आयोजित करने की यह परंपरा पिछले कई वर्षों से लगातार जारी है।




