आजकल बहुत सारी फर्टिलिटी क्लिनिक प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं को वजन कम करने की सलाह देती है। इसके लिए कुछ मामलों में GLP-1 वेट लॉस दवा का भी इस्तेमाल किया जाता है। डॉक्टर के मुताबिक मोटापा पस और इन्सुलिन रेजिस्टेंस जैसी दिक्कत को नियंत्रित करने के बाद प्रेगनेंसी की तैयारी बेहतर हो सकती है। हालांकि यह तरीका हर महिला के लिए सही नहीं होता है इसे केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।

GLP-1 दवाएं क्या हैं और इनका इस्तेमाल क्यों हो रहा है?
Glp1 ऐसी दवाओं का एक ग्रुप है जिन्हें मूल रूप से टाइट तू डायबिटीज और मोटापे के इलाज के लिए ही बनाया गया है। यह दवाई भूख को कम करने और वजन को घटाने में मदद करती है अब कुछ फर्टिलिटी डॉक्टर उन महिलाओं में इसका सीमित मात्रा में उपयोग कर रहे हैं जिन भी महिलाओं का वजन अधिक है या फिर जिन्हें pcos और इन्सुलिन रेजिस्टेंस जैसी दिक्कतें हैं। उनका मानना है कि पहले शरीर का मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर होने से आगे की फर्टिलिटी ट्रीटमेंट अधिक प्रभावि हो सकती है।
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Pregnancy से पहले वजन कम करने का क्या फायदा
डॉक्टर के अनुसार अधिक वजन होने पर कई महिलाओं में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है जिससे ओवुलेशन प्रभावित होने लगता है। अगर वजन नियंत्रित होता है तो मासिक धर्म नियमित होगा और प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना बेहतर होगी। यही कारण है कि कुछ डॉक्टर आईवीएफ या अन्य फर्टिलिटी उपचार शुरू करने से पहले वजन कम करने पर जोर देते हैं।
क्या GLP-1 सीधे फर्टिलिटी को बढ़ाती हैं?
इस सवाल का जवाब फिलहाल तो नहीं है अभी तक ऐसा कोई भी मजबूत प्रमाण नहीं मिल पाया है कि जो यह साबित कर पाए GLP-1 दवाई सीधा गर्भधारण की क्षमताएं बढ़ाती है। उनका फायदा मुख्य रूप से वजन कम करने और मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार के कारण देखने को मिलता है। डॉक्टर के अनुसार इन्हें फर्टिलिटी दवा समझना सही नहीं होने वाला है।
डॉक्टर सावधानियों की सलाह देते हैं?
गर्भधारण की कोशिश शुरू करने से पहले इन दवाओं को समय रहते बंद करना जरूरी होता है। गर्भावस्था के दौरान इनकी सुरक्षा को लेकर अभी तक कोई भी प्रमाण नहीं मिला है इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
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अब रिसर्च क्या कहती है?
अब तक हुए रिसर्च से हमें पता चलता है कि मोटापे से जूझ रही कुछ महिलाओं में वजन कम होने के बाद भी गर्भधारण की संभावनाएं बेहतर हो सकती है। लेकिन सफल प्रशव या गर्भपात के रिस्क पर इन दबाव का स्पष्ट लाभ अभी तक साबित नहीं है।




