पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले की अदालत ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 65 साल के दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। विशेष फास्ट ट्रैक कार्ट का यह फैसला घटना के 60 दिन बाद आया है। अदालत ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का बताते हुए कहा कि आरोपी का कृत्य बेहद क्रूर, अमानवीय और बर्बर था।
आरोपी 7 बच्चों का पिता और 11 बच्चों के दादा
पेशे से मजदूर जिस दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई गई है। वह आरोपी न सिर्फ 65 साल की आयु का है बल्कि वह 7 बच्चों का पिता और 11 बच्चों के दादा है। सोमवार सुबह 11 बजे आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया और कोर्ट में पेश किया गया।
नानी के घर आई थी बच्ची
यह घटना 1 मई को पुणे जिले के नसरापुर गांव में हुई थी। बच्ची गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आई हुई थी। दोपहर 3 से 4 बजे के बीच कांबले ने उसे खाने-पीने की चीजें और गाय का नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसके बाद वह उसे मवेशियों के तबेले के पास बने एक शेड में ले गया, जहाँ उसने उसके साथ रेप किया और फिर पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी।
60 दिन में ऐसे चला केस
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक अजय मिसर ने 55 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। इनमें फोरेंसिक विशेषज्ञ, जांच अधिकारी, पीड़िता के परिजन और बाल गवाह शामिल थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर 18 चोटों के निशान दर्ज किए गए थे। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, पोटेंसी टेस्ट और मेंटल फिटनेस असेसमेंट को वैध और पर्याप्त साक्ष्य माना और ऐसे क्रूर को मृत्युदंड मुकर्रर किया है।




