पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा से भारत को क्या फायदा हुआ?

What did India gain from PM Modi’s visit to the Netherlands: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की नीदरलैंड (Netherlands) यात्रा भारत के लिए सांस्कृतिक, तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। इस दौरे में भारत को एक तरफ अपनी हजार साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर वापस मिलने जा रही है, तो दूसरी तरफ सेमीकंडक्टर (Semiconductor) और चिप टेक्नोलॉजी (Chip Technology) के क्षेत्र में बड़ा अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मिला है।

नीदरलैंड के द हेग (The Hague) में हुई बैठकों और समझौतों को भारत-यूरोप संबंधों (India-Europe Relations) के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

1000 साल पुरानी चोल ताम्र पट्टिकाएं भारत लौटेंगी

इस यात्रा का सबसे बड़ा सांस्कृतिक फायदा 11वीं सदी की ऐतिहासिक चोल ताम्र पट्टिकाओं (Chola Copper Plates) की वापसी है। भारत और नीदरलैंड के बीच हुए समझौते के तहत करीब 1000 साल पुरानी ये ऐतिहासिक तांबे की पट्टिकाएं जल्द भारत लाई जाएंगी।

इनमें 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटें शामिल हैं, जिन पर तमिल भाषा (Tamil Language Inscriptions) में चोल साम्राज्य (Chola Empire) से जुड़ी अहम जानकारी लिखी गई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इन पट्टिकाओं में राजा राजेंद्र चोल प्रथम (Rajendra Chola I) और उनके पिता राजा राजराजा चोल प्रथम (Rajaraja Chola I) के शासन, प्रशासन और दान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं।

क्या होती हैं ताम्र पट्टिकाएं?

ताम्र पट्टिकाएं (Copper Plate Inscriptions) प्राचीन समय में आधिकारिक घोषणाएं, जमीन दान, प्रशासनिक फैसले और ऐतिहासिक घटनाएं दर्ज करने का माध्यम थीं।

इतिहासकारों के मुताबिक 19वीं सदी में यूरोपीय व्यापारियों और रिसर्चर्स द्वारा भारत और एशिया के अन्य हिस्सों से कई ऐतिहासिक वस्तुएं विदेश ले जाई गई थीं। अब इन धरोहरों की वापसी को भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत को बड़ा फायदा

नीदरलैंड दौरे के दौरान टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) और डच कंपनी ASML के बीच भी अहम समझौता हुआ ASML दुनिया की सबसे बड़ी और एडवांस चिप मशीन बनाने वाली कंपनियों (World Leading Semiconductor Equipment Company) में शामिल है। यह कंपनी अत्याधुनिक EUV Lithography Machines बनाती है, जिनका इस्तेमाल हाई-एंड चिप निर्माण में होता है। इस साझेदारी से भारत के सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत को कैसे मिलेगा फायदा?

1. भारत में चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर निर्माण (Semiconductor Manufacturing in India) में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है। ASML जैसी कंपनी के साथ सहयोग से भारत को नई तकनीक और विशेषज्ञता मिलेगी।

2. चीन पर निर्भरता कम होगी

दुनिया में चिप सप्लाई चेन पर चीन और ताइवान का बड़ा प्रभाव है। भारत अब वैकल्पिक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

3. रोजगार और निवेश बढ़ेगा

सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़े निवेश से भारत में हाई-टेक नौकरियां बढ़ेंगी और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट को भी फायदा मिलेगा।

मोदी बोले- भारत में निवेश का सबसे अच्छा समय

द हेग में आयोजित CEO राउंड टेबल में पीएम मोदी ने दुनियाभर की कंपनियों को भारत में निवेश करने का न्योता दिया।

उन्होंने कहा कि टैक्स सुधार, लेबर कानूनों में बदलाव और डिजिटल गवर्नेंस की वजह से भारत में मैन्युफैक्चरिंग पहले से ज्यादा आसान और सस्ती हो गई है।

मोदी ने कहा कि जो इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर कभी भारत का बड़ा आयात क्षेत्र था, वही अब तेजी से बड़ा निर्यात क्षेत्र बनता जा रहा है।

ग्रीन हाइड्रोजन और टेक्नोलॉजी में बढ़ेगा सहयोग

भारत और नीदरलैंड ने ग्रीन हाइड्रोजन, क्लीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

यह साझेदारी भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन (India Green Energy Mission) और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य के लिए अहम मानी जा रही है।

भारत में पहले से काम कर रहीं 300 डच कंपनियां

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 300 से ज्यादा डच कंपनियां (Dutch Companies in India) पहले से भारत में कारोबार कर रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ (European Union – EU) के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement – FTA) आने वाले समय में दोनों पक्षों के लिए नए व्यापारिक अवसर (India-Europe Business Opportunities) पैदा करेगा। मोदी ने डच कंपनियों से भारत में और ज्यादा निवेश करने की अपील करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहां निवेशकों को बड़े अवसर मिलेंगे।

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