MP: ट्विशा शर्मा मौत मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग का बड़ा एक्शन, MP मुख्य सचिव और DGP को सात दिन में रिपोर्ट तलब

Twisha Sharma Death Case: राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women) ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) से मामले की FIR की धाराओं, आरोपियों की गिरफ्तारी की स्थिति, जांच की प्रगति, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, फॉरेंसिक साक्ष्य (Forensic Evidence) तथा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) सहित सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी सात दिनों के अंदर मांगी है।

Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले (Twisha Sharma Death Case) में अब राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women) ने स्वतः संज्ञान ले लिया है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर (Vijaya Rahatkar) ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आयोग ने सात दिनों के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

जांच की विस्तृत जानकारी तलब

राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले में दर्ज FIR की धाराओं (FIR Sections), आरोपियों की गिरफ्तारी की स्थिति, फरार आरोपी समार्थ सिंह (Samarth Singh) की गिरफ्तारी के लिए उठाए गए कदमों, पासपोर्ट इंपाउंडमेंट (Passport Impoundment), CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स, इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्य (Forensic Evidence), पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा पहले दर्ज शिकायतों पर की गई कार्रवाई की पूरी डिटेल मांगी है।

परिवार को सुरक्षा देने के निर्देश

आयोग ने पीड़िता के परिवार को किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या चरित्र हनन से सुरक्षा प्रदान करने के सख्त निर्देश दिए हैं। आयोग ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ दहेज उत्पीड़न (Dowry Harassment) और घरेलू हिंसा (Domestic Violence) के मामलों में लापरवाही या प्रभाव का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पुलिस और एम्स की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

दूसरी ओर, जज के सामने ट्विशा के वकील ने पुलिस और एम्स (AIIMS) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। वकील ने पूछा कि एम्स ने सुसाइड बेल्ट क्यों नहीं मांगा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों का जिक्र क्यों गायब है, सास की बहन बंसल अस्पताल में काम करती हैं तो वह एम्स में मौजूद क्यों थीं, और थाने को सूचना क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यदि समय पर लिगेचर दिया गया होता तो कई संदेहों से बचा जा सकता था।

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