नईदिल्ली। एक कचौड़ी, दो समोसा इन मर्दाे का क्या भरोसा। हाल ही में सोशल मीडिया और दिल्ली में महिला सुरक्षा व बलात्कार संस्कृति के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों (प्रोटेस्ट) के दौरान चर्चा में आया एक वायरल नारा है। इस नारे का पूरा रूप एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा? है। हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली (विशेषकर दिल्ली विश्वविद्यालय और आसपास के परिसरों) में महिला सुरक्षा और रेप कल्चर के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान यह नारा महिलाओं और छात्राओं द्वारा लगाया गया था।
महिला सुरक्षा और विरोध
दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य स्थानों पर महिलाओं ने सुरक्षा और स्वतंत्रता की मांग करते हुए यह तुकबंदी वाला और अनोखा नारा इस्तेमाल किया था। सुनने में यह किसी खाने-पीने की दुकान जैसा लगता है, लेकिन इसका उपयोग पितृसत्ता और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में पुरुषों की जवाबदेही पर सवाल उठाने के लिए किया गया।
सोशल मीडिया पर बहस
इस नारे के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छिड़ गई। जहाँ एक तरफ इसे महिलाओं के आक्रोश और व्यंग्यात्मक विरोध का तरीका बताया गया, वहीं दूसरी तरफ इसकी इस बात के लिए आलोचना भी हुई कि यह सभी पुरुषों को एक ही चश्मे से देखता है।
यह नारा कैसे तैयार हुआ और इसके मायने क्या हैं?
यह नारा भारत के लोकप्रिय खान-पान (कचौड़ी और समोसा) को जोड़कर एक तुकबंदी के रूप में तैयार किया गया है। जनरेशन-जे और युवा प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक और गंभीर मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया के अनुकूल और कैची (बंजबील) भाषा शैली का इस्तेमाल किया।
महिला रोष और पितृसत्ता पर चोट
प्रदर्शन कर रही लड़कियों का उद्देश्य इस अनोखे और व्यंग्यात्मक नारे के जरिए पितृसत्तात्मक सोच और समाज में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर पुरुष जवाबदेही का सवाल उठाना था। यह नारा देखते ही देखते सड़क के प्रदर्शनों से निकलकर इंस्टाग्राम रील्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड बन गया, जिसके बाद इस पर तीखी बहस और प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
हो रही प्रतिक्रिया
इस नारे को लेकर समाज में दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं; जहां कुछ लोगों ने इसे महिला अधिकारों और सुरक्षा की मांग का एक रचनात्मक व्यंग्य माना, वहीं कई लोगों और नेताओं ने पूरे पुरुष समाज को एक लाठी से हांकने और इसे अपमानजनक बताते हुए इस पर कड़ी आपत्ति भी जताई।
कृषि मंत्री शिवराज ने कहा आत्ममंथन जरूरी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे नारे एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा पर चिंता जताई और समाज से आत्ममंथन करने की अपील की है। भोपाल में आयोजित नवगति एजुकेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम में बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने इस चर्चित और तंजिया सोशल मीडिया नारे का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां और घटनाएं पैदा हो रही हैं, जिसके कारण हमारी बेटियों और महिलाओं को पुरुषों पर अविश्वास जताने वाला ऐसा नारा लगाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और मान-सम्मान केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि यदि बहन-बेटियां समाज में सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी और पुरुषों पर भरोसा नहीं कर पाएंगी, तो देश और समाज आगे कैसे बढ़ेगा। उन्होंने पुरुषों, बेटों और उनके अभिभावकों से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने को कहा।




