खिलौने में बम से हमला प्लान? 4 मुस्लिम संदिग्ध गिरफ्तार! राम मंदिर-संसद निशाने पर

A toy bomb attack plan: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक इनके पास से IED और उससे जुड़ा विस्फोटक सामान बरामद हुआ है। जांच में सामने आया है कि ये लोग रिमोट कंट्रोल खिलौना कार में IED फिट कर हमले की तैयारी कर रहे थे। शुरुआती पूछताछ में राम मंदिर (Ram Mandir Security Threat), संसद भवन (Parliament Attack Plot India) और सैन्य ठिकानों जैसे बड़े टारगेट का जिक्र सामने आया है।

आरोपियों की पहचान और बैकग्राउंड

पुलिस ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान मोसाइब अहमद, मोहम्मद हम्माद, मोहम्मद सोहेल और शेख इमरान के रूप में हुई है। ये सभी अलग-अलग राज्यों से हैं—दो महाराष्ट्र से, एक ओडिशा से और एक बिहार से। जांच में पता चला है कि आरोपी सामान्य पेशों से जुड़े थे, लेकिन कट्टरपंथी विचारधारा (Radicalization In India Case) से प्रभावित होकर इस साजिश में शामिल हुए।

मोसाइब अहमद पहले खाड़ी देशों में ऑटो इलेक्ट्रीशियन के तौर पर काम कर चुका है और उसी तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल IED बनाने में कर रहा था। मोहम्मद हम्माद मुंबई का रहने वाला है और 12वीं का छात्र है, जिसने ऑनलाइन ग्रुप्स से विस्फोटक बनाने की जानकारी जुटाई। मोहम्मद सोहेल बिहार के कटिहार का प्लंबर है, जो सोशल मीडिया के जरिए फंडिंग और लोगों को जोड़ने का काम कर रहा था। वहीं शेख इमरान भुवनेश्वर का रहने वाला है, जिसने कथित तौर पर टारगेट लोकेशन की रेकी की थी।

रेकी और टारगेट की प्लानिंग

पुलिस जांच में सामने आया है कि शेख इमरान दिसंबर 2025 में दिल्ली आया था और उसने रेड फोर्ट (Red Fort Surveillance Case) और इंडिया गेट (India Gate Security Alert) जैसे संवेदनशील इलाकों की रेकी की थी। एजेंसियों के मुताबिक, इन लोगों ने संभावित हमलों के लिए हाई-वैल्यू टारगेट्स की पहचान की थी, जिसमें धार्मिक स्थल, सरकारी संस्थान और सैन्य ठिकाने शामिल थे।

सोशल मीडिया के जरिए नेटवर्क तैयार

जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया ग्रुप्स (Encrypted Messaging Terror Network) पर एक्टिव थे। इन प्लेटफॉर्म्स पर जिहाद, हथियार और कट्टरपंथी कंटेंट शेयर किया जाता था। इसी के जरिए नए लोगों को जोड़ने और उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।

एक आरोपी द्वारा रेड फोर्ट की एडिटेड तस्वीर शेयर की गई थी, जिसमें काला झंडा लगाया गया था। इसका मकसद लोगों को भड़काना और डर का माहौल बनाना था।

IED बनाने की तैयारी और फंडिंग मॉडल

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने IED बनाने के लिए जरूरी सामान जैसे बॉल बेयरिंग, कील और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इकट्ठा किए थे। खिलौना कार में बम फिट करने की योजना (Toy Car Bomb Plot India) इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू है। इसके अलावा, फंड जुटाने के लिए बैंक अकाउंट और QR कोड शेयर किए गए थे, जिससे इस नेटवर्क को आर्थिक मदद मिल सके।

डिजिटल सबूत और आगे की जांच

दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए हैं। इनकी फॉरेंसिक जांच (Digital Evidence Terror Investigation) की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क, संभावित लिंक और अन्य संदिग्धों का पता लगाया जा सके। फिलहाल एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या यह एक बड़ा नेटवर्क था या फिर कुछ लोगों का सीमित समूह। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इनका किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन से कनेक्शन तो नहीं है।

बड़ा सवाल: साजिश कितनी गहरी?

इस पूरे मामले ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ शुरुआती स्तर की साजिश थी या फिर किसी बड़े हमले की तैयारी? जांच जारी है, लेकिन इतना साफ है कि सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी के जरिए नए तरह के खतरे सामने आ रहे हैं, जिनसे निपटना अब पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।

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