Rewa News : मोबाइल गेम की सनक ने बुझाया घर का चिराग, माँ ने गेम खेलने से मना किया, तो इकलौते बेटे ने खाया जहर

The craze of mobile games extinguished the lamp of the house

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसी मर्मस्पर्शी घटना सामने आई है, जिसने डिजिटल दौर में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मोबाइल की लत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मनगवां थाना अंतर्गत तिवनी गांव में मोबाइल गेम न मिल पाने के क्षणिक आवेश में आकर एक 14 वर्षीय किशोर ने मौत को गले लगा लिया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तिवनी निवासी अथर्व तिवारी (14 वर्ष) को मोबाइल पर गेम खेलने की लत थी। 30 अप्रैल की सुबह अथर्व ने अपनी माँ से मोबाइल मांगा, लेकिन पढ़ाई या अन्य कारणों से माँ ने मोबाइल देने से इनकार कर दिया। माँ की यह ‘ना’ किशोर को इतनी नागवार गुजरी कि उसने आवेश में आकर घर में रखी गेहूं में डालने वाली जहरीली दवा का सेवन कर लिया।

अस्पताल में उपचार के दौरान तोड़ा दम

बेटे की हालत बिगड़ते देख परिजन आनन-फानन में उसे लेकर संजय गांधी अस्पताल, रीवा पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन जहर शरीर में पूरी तरह फैल चुका था। उपचार के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया। वह अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था, जिसकी असमय मृत्यु ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

समाज और अभिभावकों के लिए बड़ी चेतावनी

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • डिजिटल लत: मोबाइल गेमिंग बच्चों के दिमाग में ‘डोपामाइन’ के स्तर को इस कदर प्रभावित कर रही है कि वे वास्तविकता और आवेश के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे।
  • भावनात्मक कमजोरी: छोटी सी असफलता या मनाही पर बच्चों का आत्मघाती कदम उठाना उनके कमजोर होते मानसिक स्वास्थ्य की ओर इशारा करता है।
  • निगरानी की जरूरत: अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार में आ रहे चिड़चिड़ेपन या बदलावों पर नजर रखनी होगी और उन्हें तकनीक के बजाय भावनात्मक रूप से अधिक समय देना होगा।

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