सतना। शहर के व्यंकट क्रमांक-1 सभागार में चल रहे जनगणना प्रशिक्षण के दौरान शुक्रवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब खराब भोजन परोसे जाने से नाराज शिक्षकों और प्रगणकों का धैर्य जवाब दे गया। प्रशिक्षण के पहले चरण के तीसरे दिन भोजन की बेहद खराब गुणवत्ता को लेकर प्रशिक्षुओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और गुस्से में अपनी थालियां फेंक दीं।
“बारात का बचा हुआ खाना” और ‘बदबूदार’ सब्जी का आरोप
प्रशिक्षण में शामिल महिला शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों ने भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रशिक्षुओं का आरोप है कि सप्लायर द्वारा दिया गया खाना न केवल निम्न स्तर का था, बल्कि सब्जी से तेज दुर्गंध आ रही थी। एक महिला शिक्षक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “खाना ऐसा लग रहा था जैसे किसी बारात का बचा हुआ बासी भोजन पैक कर दिया गया हो।” स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बाहर फेंके गए इस भोजन को वहां मौजूद गायों ने भी खाने से इनकार कर दिया।

प्रति व्यक्ति ₹200 का बजट, फिर भी लापरवाही
हैरानी की बात यह है कि प्रशासन द्वारा ठेकेदार को प्रति व्यक्ति नाश्ते और भोजन के लिए 200 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। इसके बावजूद इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई। घटना की जानकारी मिलते ही नोडल अधिकारी और नगर निगम सतना के उपायुक्त सत्यम मिश्रा मौके पर पहुंचे। उन्होंने नाराज कर्मचारियों को शांत कराया और लापरवाह ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की चेतावनी दी।
अब होगी सैंपलिंग और सख्त कार्रवाई
उपायुक्त सत्यम मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि:
- परोसे गए भोजन की सैंपलिंग कराकर जांच कराई जाएगी।
- रिपोर्ट में गड़बड़ी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया की जाएगी।
- आगामी प्रशिक्षण सत्रों में भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी।
प्रशिक्षुओं ने प्रशासन से मांग की है कि भोजन की व्यवस्था सुधारी जाए ताकि वे बिना किसी मानसिक और शारीरिक परेशानी के अपना प्रशिक्षण सुचारू रूप से पूरा कर सकें।
