रीवा। विंध्य की सांस्कृतिक विरासत और बघेली बोली के संरक्षण के संकल्प के साथ कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में ऐतिहासिक ‘छठवां बघेली महोत्सव’ धूमधाम से संपन्न हुआ। तीन पांच फिल्म्स एवं शिवाय फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस महोत्सव ने लोक नृत्य, नाटक और पारंपरिक व्यंजनों के जरिए बघेली संस्कृति को एक नई ऊंचाई दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद जनार्दन मिश्रा ने मंच से जब ठेठ बघेली में हुंकार भरी, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने अपनी संस्कृति के प्रति चिंता जाहिर करते हुए कहा कि नई पीढ़ी तेजी से अपने पुरातन शब्दों को भूल रही है। इन शब्दों और परंपराओं को बचाना सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि विंध्य के अस्तित्व की रक्षा के लिए अनिवार्य है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘छाती के पीपर’ हास्य नाटक रहा, जिसने दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सामाजिक संदेश भी दिया। इसके अलावा पारंपरिक संस्कार गीतों और बघेली लोक नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने विंध्य की लोक कलाओं को जीवंत कर दिया। बघेली व्यंजन प्रतियोगिता में क्षेत्र के पारंपरिक स्वादों का तड़का लगा, जिसमें निशा सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त कर बाजी मारी।
विभूतियों को मिला ‘बघेली रत्न’ सम्मान
इस अवसर पर विंध्य का नाम रोशन करने वाली विभिन्न क्षेत्रों की महान हस्तियों को सम्मानित किया गया:
- चिकित्सा: डॉ. वी.डी. त्रिपाठी
- शिक्षा: पारस सर
- डिजिटल माध्यम: बघेली भाषा को वैश्विक पटल पर ले जाने वाले डिजिटल क्रिएटर्स को भी पुरस्कृत किया गया।
वैश्विक पटल पर बघेली का संकल्प
महोत्सव के आयोजक रीति सरगम पांडे और उमेश मिश्रा ‘लखन’ ने कलाकारों और दर्शकों का आभार जताते हुए कहा कि यह कारवां रुकने वाला नहीं है। उन्होंने संकल्प लिया कि बघेली बोली और संस्कृति को न केवल बचाना है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवमयी स्थान दिलाना है।
