Women Reservation Bill 2026 : लोकसभा में फेल हो गया ‘महिला आरक्षण बिल’, नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत

Women Reservation Bill 2026 : लोकसभा में शुक्रवार को शाम 7:45 बजे मोदी सरकार का महिला आरक्षण बिल गिर गया। इस बिल को पास होने के लिए 326 वोट चाहिए थे, लेकिन सरकार के पक्ष में सिर्फ 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष ने 230 वोट किए। संसद में जब भी भाजपा और विपक्ष के बीच बहस होती है, तो कई बार काफी जोरदार नतीजे सामने आते हैं, महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान भी ऐसा ही हुआ।

गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में ऐसा बोल दिया कि विपक्ष की सारी रणनीति धरी रह गई। इससे विपक्ष के पास कोई रास्ता नहीं बचा। 

अमित शाह का ‘एक घंटे’ वाला चैलेंज

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बहस की शुरुआत में कहा कि सीटों के गणित से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पांच राज्यों में सीटें बढ़ने पर भी उनका प्रतिशत पहले जैसा ही रहेगा। फिर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने पूछा कि क्या सरकार हर राज्य में 50% सीटें महिलाओं के लिए रखेगी और सुरक्षा देगी?  

अमित शाह ने जवाब दिया कि वे दोनों मांगे मान लेंगे, बस उन्हें एक घंटे का समय दे दीजिए, वे इन अमेंडमेंट्स को लेकर आएंगे।  

अमित शाह ने कहा- परिसीमन पर कोई समझौता नहीं 

अमित शाह के इस रुख से विपक्ष का मनोबल गिर गया। अगर वे हां कहते, तो बिल तुरंत पास हो जाता और मोदी सरकार का श्रेय मिलता। लेकिन अमित शाह ने साफ कहा कि वह 2026 की जनगणना और परिसीमन को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे।  

अखिलेश यादव ने कहा- हम 11 साल का अनुभव रखते हैं

जब शाह ने संशोधनों का प्रस्ताव रखा, तो विपक्ष के नेता अखिलेश यादव ने कहा, “हम 11 साल का अनुभव रखते हैं, अगर बीजेपी लिखकर भी दे कि हम महिला प्रधानमंत्री बनाएंगे, तो भी हम भरोसा नहीं करेंगे।” यह बात साफ दिखाती है कि सरकार की तेजी और निर्णय लेने की क्षमता विपक्ष को भरोसेमंद नहीं लगी।  

अब सवाल है कि सरकार के पास इस बिल को पास कराने के और क्या विकल्प हैं?

सवाल 1: क्या सरकार जॉइंट सेशन से इस बिल को पास करा सकती है?
जवाब: नहीं। संविधान के अनुच्छेद 108 के मुताबिक, जॉइंट सेशन सिर्फ सामान्य विधेयकों के लिए होता है, जब दोनों सदनों में मतभेद हो। लेकिन संविधान संशोधन बिल (131वां संशोधन) के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अनुच्छेद 368 कहता है कि संविधान में बदलाव के लिए दोनों सदनों में अलग-अलग बहुमत जरूरी है। इसलिए, यह बिल जॉइंट सेशन से पास नहीं हो सकता। अगर लोकसभा में वोट नहीं मिले, तो जॉइंट सेशन का रास्ता बंद है।

सवाल 2: बिल पास न होने का महिलाओं के आरक्षण पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: यह बहुत बड़ा असर होगा। 2023 में पास हुआ महिला आरक्षण कानून (106वां संशोधन) पहले से ही लागू है, लेकिन उसका कार्यान्वयन परिसीमन पर टिका है। मूल कानून कहता था कि महिला आरक्षण तभी लागू होगा जब पहली जनगणना के बाद परिसीमन होगा। 131वां संशोधन बिल इसी को बदलने के लिए लाया गया था ताकि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हो और 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू हो सके।

अब बिल पास नहीं होने से वह लागू नहीं होगा, और महिला आरक्षण 2029 या उसके बाद के चुनावों में लागू हो सकता है। यानी, अब यह संभवत: 2034 या उस के बाद ही लागू होगा। इससे देरी हो जाएगी।

सवाल 3: आगे सरकार के पास क्या विकल्प हैं और इस बिल को कैसे पास कराया जा सकता है?
जवाब: सरकार के पास कुछ रास्ते हैं, जिनमें समय और राजनीतिक समझौते लगेंगे।
बिल फिर से पेश करना: अगला सत्र (मॉनसून या बजट सत्र) में बिल को फिर से लोकसभा में लाया जा सकता है।  
संशोधन कर फिर से लाना: अगर विपक्ष की कुछ मांगे मान ली जाएं, तो बिल में बदलाव कर फिर से लाया जा सकता है। 
राज्यसभा में भी बहुमत जुटाना: लोकसभा में पास होने के बाद, राज्यसभा में भी बहुमत जरूरी है। यदि वहां भी अटकता है, तो फिर से चर्चा और संशोधन का रास्ता खुलेगा।  
विपक्ष से बातचीत: सरकार कह चुकी है कि सभी दल महिला आरक्षण चाहते हैं। अगर सहमति बन जाए, तो यह जल्दी पास हो सकता है।  
छोटा संशोधन: कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिना परिसीमन बदले, सिर्फ महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने का छोटा संशोधन लाया जा सकता है। लेकिन सरकार का प्लान सीटें बढ़ाने का है।  

सवाल 4: बिल नहीं पास होने से 2029 के चुनाव में क्या होगा?  
जवाब: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 2029 के लोकसभा चुनाव अभी 543 सीटों पर ही होंगे। परिसीमन नहीं होगा, इसलिए नई सीटें और आरक्षण लागू नहीं होगा। दक्षिण राज्यों की चिंता तो तुरंत दूर हो जाएगी, लेकिन महिला आरक्षण में देरी हो जाएगी। सरकार का कहना है कि बिल पास होने पर ही 2029 से नई सीटें और आरक्षण शुरू हो सकते हैं। अगर बिल गिरता है, तो दोनों चीजें 2029 के चुनाव तक टल जाएंगी।  

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