IPO: SEBI ने एक प्रस्ताव पेश किया है. जिसके तहत IPO के लिए एक अलग ‘Offer Document Summary’ लाने की योजना है. इसमें कंपनी की जरूरी जानकारी कम शब्दों में दी जाएगी. इसके साथ ही IPO से पहले गिरवी रखे गए शेयरों से जुड़ी प्रक्रिया को भी आसान बनाने का प्रस्ताव है. SEBI ने गुरुवार को कहा, ऑफर डॉक्युमेंट बहुत बड़ा और लंबा-चौड़ा होता है इस वजह से आम निवेशक उसे पढ़ने से कतराते हैं. इस कारण वे IPO प्रक्रिया में पूरी तरह से शामिल नहीं हो पाते और दस्तावेजों में दी गई जानकारी पर अपनी राय भी नहीं दे पाते
गौरतलब है कि ऑफर डॉक्युमेंट में कई हिस्सों में बहुत सारी जानकारी दी होती है. उदाहरण के लिए, कंपनी किस इंडस्ट्री में है. उसका बिजनेस क्या है उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है. उस पर कोई केस तो नहीं चल रहा है. मैनेजमेंट की राय IPO की प्रक्रिया और कंपनी के नियम-कानून आदि….
इन हिस्सों में अक्सर बहुत बारीक कानूनी वित्तीय और तकनीकी जानकारी होती है. क्योंकि ये पब्लिक इश्यू से जुड़ी सभी जरूरी बातों का खुलासा करते हैं. इसी डॉक्युमेंट के आधार पर रेगुलेटर जांच करते हैं और जनता भी इसे देख सकती है.
SEBI ने कहा कि आम निवेशक अक्सर निवेश का फैसला करने के लिए ग्रे मार्केट के ट्रेंड और सोशल मीडिया की अपुष्ट खबरों जैसे गैर-रेगुलेटेड सोर्स पर भरोसा करते हैं. चूंकि इन सोर्स से मिली जानकारी सटीक नहीं होती, इसलिए इस पर भरोसा करना निवेशकों के लिए ठीक नहीं है. अगर कंपनी खुद ही मुख्य जानकारी संक्षेप में उपलब्ध कराए, तो ऐसे सोर्स पर निर्भरता कम हो सकती है.
ऑफर डॉक्यूमेंट का एक छोटा और नानक सारांश (Standardised Summary) अनिवार्य करने से जानकारी तक पहुंच आसान हो सकती है. सेबी ने इस पर 4 दिसंबर तक आम लोगों से राय मांगी है.
लॉक-इन नियमों में ढील देगी SEBI
रेगुलेटर ने आईपीओ के समय शेयरों के लिए लॉक-इन की शर्तों में ढील देने का भी सुझाव दिया है. कंपनियों को उन मामलों में लॉक-इन नियमों का पालन करने में दिक्कते आती हैं, जहां IPO से पहले शेयर गिरवी रखे गए होते हैं. मौजूदा नियमों के तहत प्रमोटरों और अन्य लोगों के पास मौजूद IPO पूर्व शेयरों को एक निश्चित समय के लिए लॉक-इन करना जरूरी होता है.
डिपॉजिटरी का मौजूदा सिस्टम गिरवी रखे गए शेयरों को लॉक-इन करने की इजाजत नहीं देता. इससे IPO के समय कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी होती है. सेबी ने कहा कि मौजूदा नियम प्रमोटरों के लॉक-इन शेयरों को गिरवी रखने की सुविधा देते है IPO से पहले प्रमोटरों के शेयर गिरवी है, तो वे कर्जदाताओं की सहमति से छुड़ाकर लॉक-इन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं.



