इंडियन रेल। भारतीय रेलवे अपने दशकों पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलने जा रहा है और नए व्यवस्था से यात्रियों को रेल टिकट आसानी से मिलना संभव हो जाएगा। उन्हे टिकट के लिए रती भर परेशान नही होना पड़ेगा। इस नई व्यवस्था को मुकम्मल करने के लिए हाल ही में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में एक बड़ी बैठक करके जरूरी निर्देश दिए कि सिस्टम अपडेट के दौरान यात्रियों को किसी भी तरह से परेशान न होना पड़े।
1986 की व्यवस्था को कहेगा बाय-बाय
भारतीय रेलवे अब 1986 के दौर की तकनीक को बाय-बाय कहने जा रहा है और यात्रियों को भविष्य की सुविधा के लिए व्यवस्था को अपग्रेड कर रहा है। रेल मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा रिजर्वेशन सिस्टम वर्ष 1986 में शुरू किया गया था। पिछले 40 वर्षों में इसमें कई छोटे-मोटे बदलाव किए गए, लेकिन अब इसे पूरी तरह नई तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है।
लगातार कंम हो रही काउटर टिकट की संख्या
रेल मंत्रालय का उद्देश्य है,, सिस्टम की क्षमता बढ़ाना और टिकट बुकिंग को पहले से अधिक आसान बनाना है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2002 में भारतीय रेलवे ने इंटरनेट के जरिए टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू की थी। अब ज्यादातर यात्री ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं और टिकट खिड़कियों पर निर्भरता काफी कम हो गई है।
खिड़कियों से मोबाइल तक का सफर
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, यात्रियों के व्यवहार में क्रांतिकारी बदलाव आया है। 2002 में शुरू हुई इंटरनेट बुकिंग अब भारतीय रेलवे की लाइफलाइन बन चुकी है। वर्तमान में देश की कुल 88 प्रतिशत टिकट बुकिंग ऑनलाइन माध्यमों से हो रही है। रेलवे काउंटरों (टिकट खिड़कियों) पर निर्भरता अब न्यूनतम रह गई है, जिससे डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अनिवार्य हो गया है।




