NEET-UG 2026 Paper Leak : नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पेपर लीक मामला अब सिर्फ एक परीक्षा घोटाले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के सबसे बड़े ‘एजुकेशन अंडरवर्ल्ड’ की कहानी बनता जा रहा है। इस मामले में अब महाराष्ट्र के नासिक से गिरफ्तार शुभम खैरनार का नाम सामने आया है, जिसे जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी मान रही हैं। राजस्थान पुलिस के इनपुट पर नासिक क्राइम ब्रांच ने शुभम को हिरासत में लिया है। जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क में मेडिकल स्टूडेंट्स, कोचिंग संस्थान, डिजिटल चैनल्स और सिस्टम से जुड़े कई लोग शामिल थे, जिन्होंने करोड़ों रुपये का संगठित गिरोह बनाया था। अब यह मामला मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी तक भी पहुंचने की आशंका है।
कौन है नीट केस में गिरफ्तार शुभम खैरनार?
शुभम खैरनार करीब 30 साल का है और महाराष्ट्र के नासिक जिले के इंदिरानगर इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि उसका संबंध सीहोर की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से भी जुड़ा हुआ है, जहां मेडिकल और आयुष कोर्स होते हैं। सूत्रों का दावा है कि शुभम ने परीक्षा से पहले कथित “गेस पेपर” हासिल किया था, जिसे बाद में हरियाणा पहुंचाया गया और फिर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। जांच एजेंसियों का शक है कि इसी नेटवर्क के जरिए परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले प्रश्नपत्र और उसके उत्तर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाए गए थे।
शुभम को गिरफ्तारी की भनक पहले ही लग गई थी
जांच में यह भी पता चला है कि शुभम को पुलिस की कार्रवाई की खबर पहले ही लग चुकी थी। उसने अपनी पहचान छुपाने के लिए अपना हुलिया बदल लिया था, बाल कटवा लिए थे और नकली पहचान का इस्तेमाल भी किया। लेकिन तकनीकी सर्विलांस और पुराने फोटोग्राफ्स की मदद से क्राइम ब्रांच ने उसकी पहचान कर ली। जब वह देवदर्शन के लिए जाने वाला था, तभी पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से जुड़ा है शुभम का लिंक
शुभम का लिंक श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से जुड़ा होने के बाद अब जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या इस नेटवर्क में और भी मेडिकल छात्र, कोचिंग संस्थान या बड़े एजुकेशन सिंडिकेट शामिल थे। हालांकि अभी तक यूनिवर्सिटी की किसी भी तरह की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस आरोपी के संपर्कों और डिजिटल रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही है।
मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि 3 मई को NEET-UG की परीक्षा के बाद सोशल मीडिया पर एक कथित “गेस पेपर” वायरल हुआ था। जब छात्रों ने सवालों का मिलान किया, तो पता चला कि कई सवाल असली परीक्षा से हूबहू मिलते-जुलते थे। इस कारण पूरे देश में हंगामा मच गया और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। इतना ही नहीं, विवाद बढ़ने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
कैसे लीक गया NEET का पेपर?
शुरुआत में ये माना जा रहा था कि पेपर किसी प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ है, लेकिन बाद में जांच में पता चला कि पेपर वहां प्रिंट ही नहीं हुआ था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि सबसे पहले प्रश्नपत्र किसके पास पहुंचा और किस तरीके से यह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाया गया।
कौन है पूरे मामले का मास्टमाइंड?
जानकारी के मुताबिक, मनीष यादव नाम का एक शख्स इस पूरे नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड माना जा रहा है। जांच में यह भी पता चला है कि वही पेपर सप्लाई और नेटवर्किंग का जिम्मा संभाल रहा था। इसके अलावा, राकेश मंडावरिया नाम के एक और आरोपी को भी हिरासत में लिया गया है, जिस पर लीक पेपर को अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने का आरोप है।
नासिक से लेकर राजस्थान तक सीबीआई कर रही जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। अब तक पांच राज्यों से नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और करीब 45 से ज्यादा लोगों से पूछताछ हो चुकी है। सीबीआई की टीमें राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर Telegram चैट्स, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा खंगाल रही हैं।
गौरतलब है कि NEET-UG देश की बड़ी मेडिकल परीक्षाओं में से एक है, जिसमें इस वर्ष करीब 22 लाख छात्रों ने भाग लिया था। परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों छात्र नई तारीख, एडमिशन और तैयारी को लेकर परेशान हैं। उनका मानना है कि कुछ लोगों के लालच ने मेहनत करने वाले उम्मीदवारों का सपना चकनाचूर कर दिया।
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