नवदुर्गा उत्सव। जगत जननी मां दुर्गा का 9 दिवसीय दुर्गा उत्सव रविवार को पूजा-अर्चना के साथ शुरू हो गया है। मइया के भक्त दुर्गा प्रतिमा जगह-जगह स्थापित करके विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू कर दिए है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, देवी शक्ति की आराधना और धर्म की स्थापना के लिए मनाया जाता है। देवीभागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।
पर्व का ऐसा है महत्व
नवदुर्गा उत्सव को लेकर धार्मिक मान्यता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त किया था। यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि अहंकार और अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य और दैवीय शक्ति (धर्म) की ही जीत होती है। यह समय आत्मचिंतन, उपवास, ध्यान और आंतरिक शुद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है, जिससे मानसिक और शारीरिक ऊर्जा का संचार होता है।
श्रीराम की आराधना
एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्री राम ने रावण का वध करने से पहले समुद्र तट पर 9 दिनों तक मां दुर्गा की उपासना की थी। सनातन धर्म में अंक 9 को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा नवग्रह और शरीर के नौ द्वारों का भी संबंध इसी अंक से है। इस समयावधि का संबंध ऋतु परिवर्तन और आत्म-निरीक्षण से भी है, जिससे शरीर और मन को ऊर्जा मिलती है।
नौ देवियों के स्वरूप (नवदुर्गा)
शैलपुत्री (पर्वतराज हिमालय की पुत्री, स्थिरता और शक्ति की प्रतीक)
ब्रह्मचारिणी (तप और साधना की देवी)
चंद्रघंटा (साहस और युद्ध की देवी)
कूष्माण्डा (ब्रह्मांड की रचना करने वाली)
स्कंदमाता (भगवान कार्तिकेय की माता)
कात्यायनी (महर्षि कात्यायन की पुत्री)
कालरात्रि (संकटों और शत्रुओं का नाश करने वाली)
महागौरी (शांति और पवित्रता का प्रतीक)
सिद्धिदात्री (सभी प्रकार की सिद्धियां देने वाली)




