अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस। हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस, दुनिया भर की लड़कियों का सम्मान करने, उनकी आवाज़, कार्यों और नेतृत्व को सशक्त बनाने का एक वैश्विक अवसर है। यह उन सभी लोगों का है जो लड़कियों और उनके अधिकारों की परवाह करते हैं। इस दिन, हम सभी मिलकर लड़कियों के अधिकारों के सभी पहलुओं को मान्यता देते हैं और उनकी वकालत करते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 दिसंबर 2011 को प्रस्ताव पास करके 11 अक्टूबर को इस दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। पहला अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर 2012 को मनाया गया था।
ऐसा है उद्देश्य
बालिकाओं के अधिकारों, उनके सशक्तिकरण और उन्हें पेश आने वाली चुनौतियों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक असमानता) के प्रति दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाना। यह दिन लड़कियों को सुरक्षित माहौल, बेहतर शिक्षा और समान अवसर देने का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है।
प्रमुख संवैधानिक और कानूनी अधिकार
-समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14)- बालिका सहित प्रत्येक नागरिक को कानून के समक्ष समान संरक्षण और अधिकार प्राप्त हैं।
-भेदभाव से संरक्षण (अनुच्छेद 15)- धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी भी बालिका के साथ भेदभाव करना प्रतिबंधित है। राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान बनाने की छूट है (अनुच्छेद 15-3)।
–शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21-।)- 6 से 14 वर्ष तक की सभी बालिकाओं को निशुल्क और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा का मौलिक अधिकार है।
-जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21)- प्रत्येक बालिका को गरिमापूर्ण जीवन जीने और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार है।
-बाल विवाह के विरुद्ध अधिकार- बाल विवाह निषेध अधिनियम के अनुसार, लड़कियों के विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु 18 वर्ष निर्धारित है, जिससे उन्हें कम उम्र के विवाह से सुरक्षा मिलती है।
-शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 और 24)- बालिकाओं को मानव तस्करी, जबरन श्रम और सभी प्रकार के शारीरिक व मानसिक शोषण से सुरक्षा का अधिकार है।
-निःशुल्क विधिक सहायता- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत सभी बालिकाओं (और महिलाओं) को अदालत में मुफ्त कानूनी सहायता और परामर्श पाने का अधिकार है।




