MP Anganwadi Honorarium: हाईकोर्ट से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत, 2019 से मिलेगा एरियर, ब्याज नहीं

MP Anganwadi Honorarium: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 27 जून 2019 से बकाया एरियर देने के आदेश को बरकरार रखा है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि एरियर पर ब्याज नहीं मिलेगा। इस फैसले से प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बड़ी राहत मिली है, जबकि राज्य सरकार को ब्याज के अतिरिक्त वित्तीय भार से राहत मिलेगी।

MP Anganwadi Honorarium: मध्य प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मानदेय (Honorarium) मामले में हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने राज्य सरकार की उस व्यवस्था को अनुचित माना, जिसके तहत केंद्र सरकार का अंशदान बढ़ने के बाद राज्य ने अपने हिस्से में कटौती कर दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि 27 जून 2019 से प्रभावित कर्मियों को बकाया मानदेय (Arrears) का भुगतान किया जाएगा, हालांकि इस राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा।

युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश में किया आंशिक बदलाव

न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाए गए अंशदान का सीधा लाभ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंचना चाहिए था। अदालत ने माना कि राज्य सरकार अपने हिस्से में कटौती कर कर्मचारियों के वास्तविक मानदेय को कम नहीं कर सकती। हालांकि, एकलपीठ द्वारा एरियर पर ब्याज देने का जो निर्देश दिया गया था, उसे युगलपीठ ने निरस्त कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला मध्य प्रदेश बुलंद आवाज नारी शक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संगठन, भोपाल की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया था कि 27 जून 2019 के बाद केंद्र सरकार ने अपने अंशदान में वृद्धि की, लेकिन राज्य सरकार ने अपने हिस्से का योगदान घटा दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि केंद्र से मिलने वाले अतिरिक्त लाभ का फायदा कार्यकर्ताओं को नहीं मिला और उनका कुल मानदेय लगभग पहले जितना ही बना रहा।

मानदेय बहाल रहेगा, एरियर मिलेगा

इससे पहले हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 3 फरवरी 2026 को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 27 जून 2019 से पहले लागू व्यवस्था के अनुसार मानदेय बहाल किया जाए और छह महीने के भीतर ब्याज सहित एरियर का भुगतान किया जाए। राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने मानदेय बहाली और एरियर भुगतान के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन ब्याज देने के निर्देश को कानूनी आधार न होने के कारण रद्द कर दिया।

ग्रेच्युटी का लाभ भी मिलेगा

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को अपने पूर्व अंशदान की व्यवस्था जारी रखनी होगी। साथ ही पात्र आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियमानुसार ग्रेच्युटी (Gratuity) का लाभ भी उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार को ब्याज से राहत, कार्यकर्ताओं को मिलेगा बकाया

इस फैसले से राज्य सरकार को एरियर पर ब्याज के रूप में होने वाले अतिरिक्त वित्तीय भार से राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर प्रदेशभर की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को 2019 से लंबित मानदेय का एरियर मिलने का रास्ता साफ हो गया है। मामले में राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पैरवी की।

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