भोपाल। मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बिजली को लेकर सरकार ने एक बार फिर बड़ा भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए रात के बजाय दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार काम कर रही है। अभियंता दिवस पर भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती बिजली क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश अब बिजली के मामले में सरप्लस राज्य बन चुका है।
हालांकि, दिन में 10 घंटे बिजली देने की घोषणा मुख्यमंत्री पहले ही 2 सितंबर को ग्वालियर में आयोजित बलराम जयंती महोत्सव में कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
रात की सिंचाई से किसानों को मिलेगी राहत
सरकार का तर्क है कि किसानों को दिन में बिजली मिलने से रात के समय खेतों में सिंचाई करने की मजबूरी कम होगी। कई इलाकों में किसानों को बिजली सप्लाई के समय के हिसाब से रात में खेतों पर जाना पड़ता है।
अंधेरे में खेतों तक पहुंचना, बिजली के उपकरण चलाना और सर्दियों में रात के समय सिंचाई करना किसानों के लिए मुश्किल और जोखिम भरा होता है। ऐसे में दिन में बिजली की उपलब्धता से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में भी रात में सिंचाई के दौरान किसानों को होने वाली दुर्घटनाओं और परेशानियों का जिक्र करते हुए दिन में बिजली उपलब्ध कराने की बात कही थी।
20 साल में 20 हजार MW बढ़ी बिजली क्षमता
अभियंता दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता में हुई बढ़ोतरी का आंकड़ा भी बताया। उनके मुताबिक 2003 के आसपास मध्य प्रदेश की बिजली क्षमता करीब 5 हजार मेगावाट थी। पिछले करीब 20 वर्षों में इसमें लगभग 20 हजार मेगावाट की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश अब करीब 32 हजार मेगावाट की कुल बिजली क्षमता तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश पहले बिजली की कमी वाला राज्य माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है और प्रदेश सरप्लस बिजली वाले राज्यों में शामिल है।
10 घंटे बिजली देने की व्यवस्था कैसे लागू होगी?
दिन में 10 घंटे बिजली देने की घोषणा के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इसके लागू होने की व्यवस्था को लेकर है। किसानों को किस समय बिजली मिलेगी, अलग-अलग कृषि फीडरों का शेड्यूल क्या होगा और सभी जिलों में सप्लाई किस तरीके से लागू की जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी बिजली कंपनियों के स्तर पर स्पष्ट होनी बाकी है।
इसलिए फिलहाल इसे सरकार की घोषित योजना/व्यवस्था के तौर पर देखना सही होगा। इसे यह मानना जल्दबाजी होगी कि प्रदेश के हर किसान को तत्काल एक समान समय पर 10 घंटे बिजली मिलनी शुरू हो गई है।
नीमच में पंप स्टोरेज परियोजना पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ग्रीन एनर्जी और ऊर्जा भंडारण से जुड़ी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। नीमच में गांधीसागर पंप स्टोरेज परियोजना विकसित की जा रही है। इसकी क्षमता 1,920 मेगावाट है और परियोजना में ऊर्जा भंडारण की क्षमता 10,326 मेगावाट-घंटा बताई गई है।
इस परियोजना का उद्देश्य पानी को पंप स्टोरेज तकनीक के जरिए दोबारा इस्तेमाल कर बिजली उत्पादन और ऊर्जा भंडारण को मजबूत करना है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
किसानों के लिए पहले भी हो चुकी है घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 सितंबर 2026 को ग्वालियर में बलराम जयंती महोत्सव के दौरान दिन में 10 घंटे बिजली देने की घोषणा की थी। उसी कार्यक्रम में उन्होंने उद्यानिकी खेती को बढ़ावा देने के लिए एक एकड़ में उद्यानिकी फसल लगाने पर 2 लाख रुपये तक की सहायता देने की बात भी कही थी।
इसके अलावा कार्यक्रम में किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल और 200 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के कार्यालयों की शुरुआत भी की गई थी।




