Bus Strike in MP: मध्य प्रदेश में बस हड़ताल से लंबी दूरी और ग्रामीण इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी, क्योंकि 2 मार्च से निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो रही है, जिसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में निजी बसों का संचालन बंद रहेगा और कुल 28 हजार से अधिक बसें सड़कों से गायब हो जाएंगी। इंदौर से ही नहीं चलेंगी 1100 बसें, जहां से प्रतिदिन 40 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं, जिससे होली जैसे प्रमुख त्योहार पर यात्रियों, छात्रों और व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
Bus Strike in MP: होली पर्व से ठीक पहले मध्य प्रदेश में परिवहन व्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। निजी बस ऑपरेटरों ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है, जिससे प्रदेश भर में हजारों बसों के पहिए थम जाएंगे। इंदौर से रोजाना चलने वाली 1100 से अधिक बसें प्रभावित होंगी, जिससे प्रतिदिन 40 हजार से ज्यादा यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हड़ताल से लाखों यात्रियों पर असर
यह हड़ताल पूरे प्रदेश के 55-56 जिलों में लागू होगी। स्टेज कैरिज, उपनगरीय और लंबी दूरी की बसें पूरी तरह बंद रहेंगी। होली के दौरान घर लौटने वाले छात्र, मजदूर और परिवारों को सबसे ज्यादा दिक्कत होगी। ग्रामीण मार्गों पर यात्रा लगभग ठप हो जाएगी, जबकि वैकल्पिक साधनों (जैसे टैक्सी, प्राइवेट वाहन) पर भारी भीड़ और किराए में 5-7 गुना तक उछाल की आशंका जताई जा रही है। व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित होंगी।
नई परिवहन नीति के विरोध में हड़ताल
प्राइम रूट बस ओनर्स एसोसिएशन मध्य प्रदेश और मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन के आह्वान पर यह हड़ताल हो रही है। बस संचालकों का मुख्य विरोध मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना (या सुगम परिवहन योजना) से है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2026 से इंदौर सहित प्रदेश में प्रस्तावित है।
सरकार ने यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (या मध्य प्रदेश यात्री अवं परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) नामक कंपनी का गठन किया है, जो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित बस संचालन करेगी। इस योजना के तहत अप्रैल 2026 से इंदौर सहित प्रदेश में नई सुगम परिवहन व्यवस्था शुरू होने वाली है, जिसमें सरकार बसें खरीदने के बजाय निजी ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करेगी, लेकिन निजी बस मालिकों का आरोप है कि किन मार्गों पर बसें चलेंगी इसकी कोई स्पष्टता नहीं है, उनकी भूमिका क्या होगी, मौजूदा परमिट व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा और योजना की पूरी डिटेल सार्वजनिक न होने से उनके व्यवसाय के भविष्य को लेकर गहरी अनिश्चितता बनी हुई है।
बस मालिकों का दावा
प्राइम रूट बस ओनर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद शर्मा और महामंत्री सुशील अरोरा ने कहा कि 2005 में मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बंद होने के बाद निजी बस मालिकों ने ही यात्री सेवा की जिम्मेदारी संभाली। तब से वे सरकारी नियमों के अनुसार सस्ती और सुलभ सेवा दे रहे हैं। किराया भी सरकार तय करती है। उन्होंने मांग की कि नई नीति लागू करने से पहले बस ऑपरेटरों को विश्वास में लिया जाए और पूरी योजना सार्वजनिक की जाए। यदि 1 मार्च तक सरकार स्पष्टता नहीं देती, तो हड़ताल जारी रहेगी।
यात्रियों के लिए सलाह
यात्रियों को सलाह है कि होली से पहले वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था (ट्रेन, प्राइवेट बसें या कारपूल) की प्लानिंग करें। स्थिति पर नजर रखें, क्योंकि हड़ताल अनिश्चितकालीन है और सरकार से बातचीत का दौर जारी है।
