भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों के लिए ‘श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना’ शुरू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को हर महीने 7,500 रुपए की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। इस राशि का इस्तेमाल कोचिंग फीस, किताबें, ट्यूशन, हॉस्टल और आने-जाने जैसे पढ़ाई से जुड़े खर्चों के लिए किया जा सकेगा।
योजना का खास फोकस NEET, JEE और CLAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों पर रहेगा। हालांकि, यह योजना सभी छात्रों के लिए नहीं होगी। इसका लाभ निर्माण श्रमिकों के उन बच्चों को देने की तैयारी है, जो पढ़ाई में मेधावी हैं और निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं।
80 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाले छात्रों को प्राथमिकता
प्रस्तावित योजना के मुताबिक विद्यार्थियों के चयन में उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को महत्वपूर्ण आधार बनाया जाएगा। 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल करने वाले छात्रों को योजना में शामिल करने की तैयारी है।
यानी केवल निर्माण श्रमिक का बच्चा होना पर्याप्त नहीं होगा। छात्र को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता भी पूरी करनी होगी। सरकार का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करना है, जिनमें प्रतिभा है लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति महंगी कोचिंग और आगे की पढ़ाई का खर्च उठाने में बाधा बन रही है।
7,500 से कोचिंग, किताब और हॉस्टल का खर्च
चयनित विद्यार्थियों को हर महीने 7,500 रुपए की सहायता देने का प्रस्ताव है। इस राशि का इस्तेमाल पढ़ाई से जुड़े विभिन्न खर्चों में किया जा सकेगा। इसमें ट्यूशन, किताबें, हॉस्टल, आने-जाने का खर्च और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग फीस शामिल की जा सकती है। इसका मतलब है कि यदि किसी निर्माण श्रमिक का बच्चा डॉक्टर बनने के लिए NEET की तैयारी कर रहा है, इंजीनियरिंग के लिए JEE की तैयारी कर रहा है या कानून की पढ़ाई के लिए CLAT देना चाहता है, तो उसे तैयारी से जुड़े खर्चों में आर्थिक मदद मिल सकेगी।
कुल सीटों में 20% लड़कियों के लिए
योजना में छात्राओं के लिए भी विशेष प्रावधान रखा गया है। कुल सीटों में 20 प्रतिशत सीटें लड़कियों के लिए आरक्षित रखने की तैयारी है। यदि शुरुआती चरण में 500 बच्चों का चयन किया जाता है तो इस अनुपात के हिसाब से अधिकतम 100 सीटें छात्राओं के लिए हो सकती हैं।
श्रमिक कल्याण बोर्ड उठाएगा खर्च
योजना के खर्च की व्यवस्था निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से किए जाने की बात कही गई है। यानी योजना के लिए श्रमिक कल्याण बोर्ड के फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि श्रमिक कल्याण के लिए उपलब्ध राशि का इस्तेमाल उनके बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए किया जा सकता है।
पहले चरण में सीमित बच्चों पर होगा प्रयोग
सरकार शुरुआत में सभी पात्र विद्यार्थियों को योजना में शामिल नहीं करेगी। पहले सीमित संख्या में बच्चों को लेकर योजना का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। योजना से जुड़े बयान में पहले चरण में 500 बच्चों पर प्रयोग किए जाने की बात कही गई है। वहीं आगे के बैच में 600 बच्चों को लाभ देने का उल्लेख है। योजना के शुरुआती परिणामों के आधार पर भविष्य में लाभार्थी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
ऑनलाइन करना होगा आवेदन
योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन की तारीख और प्रक्रिया मंडल के पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। आवेदन के दौरान प्रिंसिपल द्वारा सत्यापित मार्कशीट लगाने का प्रावधान बताया गया है। वहीं ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही गई है।
11-12 सितंबर की बैठक के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
योजना को लेकर 11 और 12 सितंबर को मुंबई में नेशनल लेबर वेलफेयर की बैठक प्रस्तावित है। इसमें श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई है।
सरकार की तैयारी योजना को इसी साल लागू करने की है। इसके लिए योजना का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है और इसे गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया बताई गई है।
अभी योजना प्रस्तावित, आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार
फिलहाल श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना को प्रस्तावित योजना के तौर पर देखा जाना चाहिए। पात्रता, सीटों की संख्या, आवेदन प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े अंतिम नियम आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद स्पष्ट होंगे।
सरकार का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर निर्माण श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आर्थिक सहारा देना है, ताकि पैसे की कमी उनकी पढ़ाई और करियर के रास्ते में बाधा न बने।




