TMC में महाबगावत: 20 बागी सांसदों का NCPI में विलय, दलबदलुओं के खिलाफ बनी 3 साल पुरानी पार्टी में मची हलचल

Merger of 20 rebel TMC MPs into NCPI

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 बागी सांसदों ने अचानक नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI में अपने विलय की घोषणा कर दी है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बागी सांसदों ने नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अपने गुट के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। बागी गुट की कमान संभाल रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि उनके पास दो-तिहाई सांसदों का स्पष्ट बहुमत है, जिसके कारण उन पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा। उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि उनका यह गुट केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार को अपना समर्थन देगा। इस बड़े घटनाक्रम से ठीक पहले बागी सांसदों ने बंगाल भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की थी।

इस पूरे राजनीतिक ड्रामे में सबसे ज्यादा चर्चा NCPI पार्टी की हो रही है, जिसका इतिहास बेहद दिलचस्प है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, महज 3 साल पहले यानी साल 2023 में पश्चिम बंगाल के एक दंपत्ति उत्तिया कुंडू और शेउली कुंडू ने इस पार्टी की नींव रखी थी। दस्तावेजों में उत्तिया कुंडू पार्टी के अध्यक्ष हैं, जो खुद को एक बंगाली अखबार का संपादक और शिक्षक बताते हैं, जबकि उनकी पत्नी शेउली कुंडू कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील हैं और पार्टी की कोषाध्यक्ष हैं। हावड़ा के बानीपुर इलाके में स्थित इस पार्टी के दफ्तर के बाहर सोमवार को अचानक सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि NCPI ने जब अपनी शुरुआत की थी, तब उनके चुनावी पोस्टरों पर नारा था— “अपने अधिकारों को बचाने के लिए दलबदलुओं को नकारें”। लेकिन आज इसी पार्टी में दलबदल का सबसे बड़ा खेल हो गया है। इसके अलावा, 13 मई को पार्टी अध्यक्ष उत्तिया कुंडू ने फेसबुक पर बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें बधाई भी दी थी, जिसके बाद इस पूरी क्रोनोलॉजी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अगर इस पार्टी के चुनावी वजूद की बात करें, तो वह न के बराबर रहा है। बंगाल में रजिस्टर्ड होने के बावजूद NCPI ने अपनी चुनावी शुरुआत 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से की थी, जहां पार्टी ने 4 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। पूरी पार्टी को चुनाव में महज 1 हजार 198 वोट मिले थे और इसके उम्मीदवार या तो ‘नोटा’ से पीछे रहे या उसके आसपास ही सिमट गए। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पार्टी को कुल ₹1 लाख 13 हजार का चंदा मिला था।

इस बड़ी बगावत के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला खेमा पूरी तरह से एक्टिव हो गया है। सुदीप बंद्योपाध्याय ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस बागी गुट को अलग दल के रूप में मान्यता न देने की अपील की है। उन्होंने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि ‘असली TMC’ कौन है, इसका फैसला अब अदालत की चौखट पर किया जाएगा। इधर, बागी सांसदों के हौसले बुलंद हैं और चर्चा है कि वे लोकसभा में अलग बैठने की जगह मिलने के बाद, निर्वाचन आयोग के सामने TMC के आधिकारिक चुनाव चिन्ह ‘जुड़वा फूल’ पर भी अपना कानूनी दावा ठोकने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल, हावड़ा से लेकर दिल्ली तक इस मामले को लेकर सुरक्षा और सियासत दोनों चरम पर हैं।

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