मध्य प्रदेश के सीधी जिले से एक बेहद दर्दनाक और डराने वाली खबर सामने आई है। रामपुर नैकिन थाना क्षेत्र के भंवरसेन घाट पर सोमवार दोपहर को पिकनिक मनाने आए चार युवक-युवतियां सोन नदी में डूब गए। ये सभी लोग मैहर जिले से अपने रिश्तेदारों के साथ यहाँ आए थे। नदी में नहाने के दौरान सभी लोग अचानक गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गए। देखते ही देखते चारों लोग नदी के गहरे और खतरनाक भंवर में समा गए। हादसे के बाद घाट पर अफरा-तफरी मच गई और परिजनों में चीख-पुकार उठ गई।
एक युवती का शव बरामद, तीन अब भी लापता
घटना की सूचना सोमवार दोपहर करीब 12:30 बजे प्रशासन को मिली। तहसीलदार रामपुर नैकिन आशीष मिश्रा, रामपुर नैकिन थाना पुलिस और खड्डी चौकी पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से तुरंत तलाश अभियान शुरू किया गया। घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी में एक युवती का शव तैरता हुआ मिला। गोताखोरों ने शव को नदी से बाहर निकाला। मृतका की पहचान 24 वर्षीय ज्योति सेन के रूप में हुई है। वह मैहर जिले के रामनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत बूढ़ा बाउर की रहने वाली थी। इस हादसे में अभी भी तीन लोग लापता हैं। लापता लोगों में 15 वर्षीय नाबालिग सुभि सेन, 22 वर्षीय नीलू बैस और राजगढ़ का रहने वाला 26 वर्षीय लखन केवट शामिल हैं।
3 घंटे बाद भी नहीं पहुँची रेस्क्यू टीम, ग्रामीणों ने निकाला शव
इस बड़े हादसे के बाद प्रशासन के दावों की पोल खुलती नजर आई। दोपहर करीब 12 बजे घटना होने के 3 घंटे बीत जाने के बाद भी एसडीईआरएफ (SDERF) की टीम मौके पर नहीं पहुँची थी। रेस्क्यू टीम के न पहुँचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाकर एक युवती के शव को नदी से बाहर निकाला। घाट पर मौजूद पीड़ित परिजन लगातार प्रशासन से टीम भेजने के लिए मोबाइल पर संपर्क साधते रहे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे अपनों की तलाश के लिए टकटकी लगाए बैठे हैं। नदी का यह क्षेत्र अपने गहरे भंवर और तेज बहाव के कारण पहले से ही बेहद खतरनाक माना जाता है।
नदी में मौजूद हैं 14 मगरमच्छ और घड़ियाल, बढ़ा खतरा
इस हादसे ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि इस नदी में मगरमच्छों और घड़ियालों का भारी खतरा है। सोन नदी का यह वही हिस्सा है, जहाँ सोन घड़ियाल अभयारण्य (सेंचुरी) बनाने की योजना है। प्रशासन ने कुछ समय पहले ही यहाँ 14 मगरमच्छ और घड़ियाल छोड़े थे। यहाँ तक कि पाँच दिन पहले भी एक तालाब से मगरमच्छ का रेस्क्यू कर इसी नदी में छोड़ा गया था। नदी में हिंसक जीवों की मौजूदगी के कारण लापता लोगों की जान को लेकर डर और ज्यादा बढ़ गया है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की निगरानी में स्थानीय स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।




