कांग्रेस समेत 19 पार्टियों का दिल्ली में विराट प्रदर्शन, एसआईआर का विरोध, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और यहां का रामलीला मैदान रविवार को राजनैतिक सरगर्मी का केन्द्र बन गया। यहां कांग्रेस पार्टी समेत 19 विपक्षी दल एक जुट होकर दिल्ली की सड़कों पर उतरे और रामलीला मैदान में जन सभा को सम्बोधित कर रहे है। संसद में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता राहूल गांधी ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर आवाज उठाए है और उन्होने कहा कि वोट चोरी में उन्हे जेल जाना पड़ेगा, क्योकि यह कोई छोटी मोटी चोरी नही है। वही कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पाताल में क्यों न चले जाएं, उन्हें वहां से भी खोज लाएंगे।

ये रहे मौजूद

इंडिया ब्लॉक की इस रैली में मंच पर राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव समेत 19 पार्टियों के नेता मौजूद रहे। इससे पहले उन्होने दोपहर 12 बजे मार्च निकाला और मार्च मिंटो जंक्शन से शुरू होकर 3 बजे रामलीला मैदान पहुंचा। विपक्षी दलों की इस दौरान एसआईआर के खिलाफ आवाज उठाते हुए ज्ञानेश कुमार को एसआईआर में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार बताया।

एसआईआर और ज्ञानेश का विपक्ष क्यों कर रहा विरोध

विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का कड़ा विरोध कर रहा है। इसके प्रमुख वजह है 13 करोड़ से अधिक नाम हटना है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे वैध और गरीब मतदाताओं के मतदान का अधिकार छिनने का खतरा पैदा हो गया है।

बीजेपी को फायदा पहुँचाने का आरोप

इंडिया गठबंधन और विपक्षी दलों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम कर रहे हैं और यह प्रक्रिया चुनाव को प्रभावित करने की एक साजिश है। मीडिया खबरों के तहत चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) ने ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई है। आरोप है कि कई बड़े फैसले अन्य आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना लिए गए हैं।

फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव

विपक्ष का यह भी आरोप है कि नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 के नियमों में अनधिकृत और गैर-कानूनी बदलाव किए गए हैं। आरोप है कि ईआरओनेट और इसीनेट प्रणालियों के जरिए चुनावी डेटा पर केंद्रीय नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है, जो जमीनी स्तर के अधिकारियों के अधिकारों को सीमित करता है। इन्हीं मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैलियां की हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को शुद्ध करना, अपात्र नामों को हटाना और पात्र मतदाताओं को बनाए रखना है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया है कि इससे जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

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