रीवा। पवित्र सावन मास के पहले सोमवार पर पूरा रीवा जिला शिवमय नजर आया। तड़के सुबह से ही शहर के प्रसिद्ध महामृत्युंजय मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर और अन्य प्रमुख शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं का तांता लग गया। भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। जगह-जगह भंडारों का आयोजन हुआ और पूरा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
महामृत्युंजय मंदिर में उमड़ी भारी भीड़
शहर के ऐतिहासिक और सबसे प्रसिद्ध महामृत्युंजय मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। अलसुबह से ही जलाभिषेक के लिए लंबी-लंबी कतारें लग गईं। हालाँकि, इस भारी भीड़ के बीच दर्शन करने पहुँचे श्रद्धालुओं को प्रशासनिक व्यवस्थाओं की खामियों के चलते खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मुख्य दरवाजा बंद होने से करना पड़ा लंबा चक्कर
किले के भीतर स्थित महामृत्युंजय मंदिर के आवागमन मार्ग को लेकर भक्तों में असंतोष भी देखा गया। पहले मंदिर का मुख्य दरवाजा सभी श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता था, जिससे आवागमन बेहद सुगम था। लेकिन, पिछले कुछ समय से इस मुख्य द्वार को आम श्रद्धालुओं के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके चलते अब दूर-दराज से आने वाले भक्तों को मछरिहा दरवाजे की तरफ से एक लंबा चक्कर काटकर मंदिर पहुँचना पड़ रहा है, जिससे रास्ते की दूरी काफी बढ़ गई है।
स्थानीय निवासियों को भी झेलनी पड़ी दुविधा
इस मार्ग प्रतिबंध का असर सिर्फ बाहरी श्रद्धालुओं पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों पर भी पड़ा है। स्थिति यह है कि किले के ठीक सामने स्थित उपरहटी क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को भी मुख्य द्वार से प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्हें भी मजबूरन मछरिहा द्वार से घूमकर ही जाना पड़ रहा है। सावन के पहले सोमवार जैसे बड़े पर्व पर इस प्रकार की व्यवस्थाओं के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी असुविधा उठानी पड़ी, जिससे आमजनों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी देखने को मिली।




