पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आंतरिक संकट अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। पार्टी के नाम और उसके प्रसिद्ध चुनाव चिह्न ‘घास पर दो फूल’ को लेकर चल रही अंदरूनी लड़ाई अब आगामी नंदीग्राम उपचुनाव के मुहाने पर आ खड़ी हुई है। टीएमसी के बागी गुट ने पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ने का सार्वजनिक न्योता दिया है। इसके साथ ही बागी गुट ने यह वादा भी किया है कि यदि ममता बनर्जी इस सीट से मैदान में उतरती हैं, तो वे उनके खिलाफ अपना कोई भी प्रत्याशी खड़ा नहीं करेंगे।
यह घोषणा एक ओर जहां ममता बनर्जी के लिए एक राजनीतिक अपील नजर आ रही है, वहीं दूसरी ओर इसे एक सोची-समझी सियासी चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है। नंदीग्राम वही सीट है जहां 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को अपने ही पूर्व सहयोगी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
कोलकाता में गरमाया सियासी पारा: बागी गुट का बड़ा प्रस्ताव
कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर के बाहर बागी टीएमसी गुट ने औपचारिक रूप से अपना पक्ष रखा। इस दौरान बागी गुट के नेताओं ने स्पष्ट किया कि नंदीग्राम उपचुनाव उनके लिए केवल एक सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि यह पार्टी के राजनीतिक विरासत की लड़ाई है।
पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे समय में जब आधिकारिक टीएमसी और बागी टीएमसी के बीच असली संगठन होने का दावा चुनाव आयोग के समक्ष लंबित है, बागी खेमे का यह दांव ममता बनर्जी के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
बागी प्रवक्ता रिजु दत्ता का बयान: नंदीग्राम से जीतकर आएं ममता
विधानसभा भवन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बागी टीएमसी गुट के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा, “यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ने का फैसला करती हैं, तो हमारा गुट वहां से कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा। हम चाहते हैं कि वह नंदीग्राम से चुनाव लड़ें, वहां से ऐतिहासिक जीत दर्ज करें और सम्मान के साथ विधानसभा में लौटें।”
रिजु दत्ता ने यह भी कहा कि उनका गुट निर्वाचन आयोग के सभी कानूनी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन कर रहा है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आयोग से उनके गुट को पार्टी का नाम और सिंबल प्राप्त करने में सफलता मिलेगी। हालांकि, यदि ऐसा नहीं भी होता है, तो भी उनका रुख ममता बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने पर अडिग रहेगा।
भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे को रोकने का दावा
इस सियासी कदम के पीछे की मंशा को स्पष्ट करते हुए बागी गुट के एक और वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा ने स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बागी खेमे का मुख्य उद्देश्य नंदीग्राम में भाजपा-विरोधी वोटों के बिखराव को रोकना है।
मदन मित्रा की प्रतिक्रिया और ‘B-टीम’ के आरोपों पर सफाई
तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक खेमे द्वारा बागी नेताओं पर लगातार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ‘बी-टीम’ के रूप में काम करने के आरोप लगाए जा रहे थे। इन आरोपों का जवाब देते हुए मदन मित्रा ने कहा:
“यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव मैदान में आती हैं और हम अपना प्रत्याशी नहीं उतारते, तो इससे यह पूरी तरह साबित हो जाएगा कि हमने बीजेपी को विपक्ष का वोट बांटने का कोई मौका नहीं दिया। हम पर लगाए जा रहे ‘बी-टीम’ के सभी आरोप बेबुनियाद साबित होंगे।”
नंदीग्राम का इतिहास: 2021 की हार और मौजूदा चुनावी समीकरण
नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति का ऐतिहासिक केंद्र रहा है। वर्ष 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ही वह मुख्य पड़ाव था जिसने 34 वर्षों के वाममोर्चा शासन को उखाड़ फेंकने में ममता बनर्जी की मदद की थी।
| वर्ष | घटनाक्रम / चुनावी स्थिति | मुख्य परिणाम |
| 2007 | नंदीग्राम आंदोलन | टीएमसी के उत्थान और वाममोर्चा के पतन का कारण बना। |
| 2021 | ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी | शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को कड़े मुकाबले में हराया। |
| 2026 | विधानसभा चुनाव परिणाम | शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों जगह जीत दर्ज की। |
| 2026 | सीट खाली होना | अधिकारी ने भवानीपुर सीट रखी और नंदीग्राम छोड़ दी, जिससे उपचुनाव की नौबत आई। |
शुभेंदु अधिकारी द्वारा नंदीग्राम सीट खाली किए जाने के बाद ही यहां उपचुनाव की स्थिति बनी है। ऐसे में ममता बनर्जी के लिए इस सीट पर दोबारा उतरना एक बड़ा राजनीतिक जोखिम भी हो सकता है और खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाने का मौका भी।
चुनाव आयोग के पाले में गेंद: नाम और सिंबल पर खींचतान
वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में विभाजित नजर आ रही है। ऋतब्रत बनर्जी और वरिष्ठ नेताओं की अगुआई वाला बागी गुट खुद को असली टीएमसी बता रहा है। उन्होंने विधानसभा में समानांतर नेतृत्व ढांचा तक घोषित कर दिया है।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी का आधिकारिक खेमा अपने स्तर पर प्रत्याशियों की सूची अंतिम रूप देने में जुटा है। चुनाव आयोग ने अभी तक यह निर्णय नहीं लिया है कि सिंबल किस गुट को आवंटित होगा। यदि फैसला आने में देरी होती है, तो बागी गुट निर्दलीय प्रत्याशियों के तौर पर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।
नंदीग्राम उपचुनाव की प्रमुख तारीखें
- नामांकन की शुरुआत: 9 सितंबर 2026
- नामांकन की अंतिम तिथि: 16 सितंबर 2026
- नामांकन पत्रों की जांच: 17 सितंबर 2026
- नाम वापसी की अंतिम तिथि: 19 सितंबर 2026
- मतदान की तिथि: 6 अक्टूबर 2026
- मतगणना एवं परिणाम: 9 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: नंदीग्राम उपचुनाव में टीएमसी के बागी गुट की क्या मांग है?
उत्तर: टीएमसी के बागी गुट की मांग है कि ममता बनर्जी स्वयं नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ें। बागी गुट के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने घोषणा की है कि यदि ममता बनर्जी मैदान में उतरती हैं, तो बागी खेमा उनके खिलाफ कोई भी प्रत्याशी नहीं उतारेगा ताकि भाजपा विरोधी वोट न बंट सकें।
प्रश्न 2: नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर: 2026 के चुनावों में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव जीता था। उन्होंने अपने पास भवानीपुर सीट रखने का फैसला किया और नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण नियमानुसार नंदीग्राम में उपचुनाव कराया जा रहा है।
प्रश्न 3: 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम का क्या परिणाम रहा था?
उत्तर: 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट बेहद चर्चित रही थी। इस सीट पर ममता बनर्जी ने खुद चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें अपने पूर्व सहयोगी और भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी के हाथों कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था।
प्रश्न 4: टीएमसी का सिंबल विवाद क्या है और यह किसके पास लंबित है?
उत्तर: तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘घास पर दो फूल’ चुनाव चिह्न पर ममता बनर्जी के आधिकारिक खेमे और बागी गुट दोनों का दावा है। यह मामला वर्तमान में भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission) के पास लंबित है और आयोग के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।
नंदीग्राम उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व और राजनीतिक वर्चस्व की परीक्षा है। बागी गुट द्वारा ममता बनर्जी के सामने फेंका गया यह सियासी पासा उन्हें एक कठिन धर्मसंकट में डालता है। अब देखना यह होगा कि ममता बनर्जी इस चुनौती को स्वीकार कर नंदीग्राम के मैदान में दोबारा कदम रखती हैं या फिर पार्टी अपनी किसी नई रणनीति के तहत प्रत्याशी उतारती है।




