पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन होता दिख रहा है। राज्य की सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की विदाई लगभग तय हो गई है। भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाती दिख रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय दलों की लड़ाई का मैदान रही है।
बड़ा मुद्दा बनाया
ममता बनर्जी 2011 में लेफ्ट को सत्ता से बेदखल कर बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थीं। इसके बाद से वह लगातार तीन बार राज्य का चुनाव जीतीं। ममता अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार, हिंसा जैसे मुद्दों से घिर गईं। भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, अपराध, टीएमसी कार्यकर्ताओं की कथित गुंडागर्दी को बड़ा मुद्दा बनाया और जोर-शोर से जनता तक पहुंचाया।
महिला डॉक्टर का दुष्कर्म और हत्या
कोलकाता में हुई महिला डॉक्टर का दुष्कर्म और हत्या ने ममता सरकार की कानून व्यावस्था पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए। आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। भाजपा ने इस मुद्दे को पूरी तरह भुनाते हुए आरजी कर पीड़िता की मां को चुनावी मैदान में उतारा। वह चुनाव अभी तक के परिणामों में आगे चल रही हैं।
विसंगतियों को ढाल बनाया
भाजपा सीधे व्यक्तिगत प्रहारों के बजाय 15 साल की एंटी-इंकंबेंसी और प्रशासनिक विसंगतियों को ढाल बनाया। उन्होंने ममता के ही अस्त्रों से उन्हें घेरने की कोशिश की। चाहे वह मुरमुरा- चाय पर चर्चा हो या झालमुड़ी का स्वाद । फ्लैट के लिए पांच लाख का दांव सीधे तृणमूल की राजनीति की काट के तौर पर देखा गया। भाजपा ने चुनाव प्रचार में यह नरैटिव बनाने की कोशिश की कि अब चुनावी मुद्दों की बात हो रही है, ना कि चेहरे की। वहीं पीएम मोदी और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ममता पर सीधे हमलावर नहीं दिखी। जिसे पिछले चुनाव में भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण माना गया था। भाजपा ने इस बार चुनाव मोदी बनाम ममता नहीं बनने दिया, जिससे ध्रुवीकरण सीमित रहा। भाजपा ने इस बार बंगाल के चुनाव प्रचार की कमान स्थानीय नेताओं को सौंपी।
- भाजपा की बढ़त: शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) बहुमत के आंकड़े (148) को पार कर आगे चल रही है, जो राज्य में पहली बार सरकार बनाने की तैयारी में है।
- टीएमसी की हार: 15 वर्षों तक शासन करने के बाद, ममता बनर्जी की टीएमसी पिछड़ती दिख रही है।
- नंदीग्राम पर नजर: नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी और भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के बीच कड़ी टक्कर है।
- प्रमुख मुद्दे: भाजपा की इस बढ़त के पीछे 15 साल की सत्ता विरोधी लहर, कानून-व्यवस्था के मुद्दे, संदेशखाली और आरजी कर जैसी घटनाएं मुख्य कारण मानी जा रही हैं।
पश्चिम बंगाल में अब तक का सफर (2011-2026):
- 2011: ममता बनर्जी ने ‘मां-माटी-मानुष’ के नारे के साथ लेफ्ट को 34 साल बाद सत्ता से बेदखल किया।
- 2016 और 2021: ममता बनर्जी ने लगातार जीत के साथ अपनी स्थिति मजबूत की।
- 2026: 15 साल की “ममतानॉमिक्स” और शासन के बाद, भाजपा ने राज्य में कमल खिलाने की राह पर है।




