Maharashtra Politics Shivsena : ‘सांसद तो झांकी है, विधायक अभी बाकी हैं?’ उद्धव ठाकरे की बैठक में 4 विधायक गायब

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Maharashtra Politics Shivsena : महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के साथ फिर से राजनीति में खेला हो रहा है। पार्टी की अहम बैठक में तीन विधायक और एक एमएलसी गैरहाजिर रहे, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 

सोमवार को मुंबई के ‘शिवालय’ दफ्तर में उद्धव ठाकरे ने मानसून सत्र के लिए विधायकों की बैठक बुलाई थी। ठीक उसी समय, महज 500 मीटर की दूरी पर उद्धव के 6 बागी सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो रहे थे। ऐसे नाजुक वक्त पर विधायक संजय पोतनीस, राहुल पाटिल, संजय देरकर और MLC सुनील शिंदे (जिन्होंने आदित्य ठाकरे के लिए अपनी वर्ली सीट छोड़ी थी) का बैठक में न पहुंचना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता।

शिवसेना यूबीटी की बैठक में नहीं पहुंचे विधायक 

महाराष्ट्र में 22 जून को उद्धव की पार्टी शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों ने अपने पद छोड़ दिए हैं, जिससे संगठन की स्थिति कमजोर हो रही है। दरअसल, शिवसेना यूबीटी ने सोमवार को विधायकों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विधायक संजय देरकर (यवतमाल), राहुल पाटिल (परभणी), संजय पोतनीस (कलीना, मुंबई) और एमएलसी सुनील शिंदे शामिल नहीं हुए। राहुल पाटिल एमएलसी चुनाव में व्यस्त थे, जबकि सुनील शिंदे अपने गांव में पूजा कार्यक्रम में गए थे। बाकी नेताओं ने भी निजी कारण और स्वास्थ्य कारण बताए। इसके बाद विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक में भी केवल तीन विधायक और एक एमएलसी अनुपस्थित रहे। इन नेताओं ने पहले ही अपनी गैरहाजिरी की जानकारी दी थी। 

महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी का डाउनफाल शुरू 

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की बैठक का हाल जानने के बाद विपक्ष की भूमिका को लेकर एमएलसी अंबादास दानवे ने कहा कि बैठक में किसानों, जनता, मुंबई, विदर्भ और मराठवाड़ा में पानी की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) विधानसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है और जनता के मुद्दों को आक्रामक रूप से उठाना जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी अभी भी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद पर कायम है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। 6 सांसदों के चले जाने के बाद उद्धव सेना के जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है। विधायकों को लग रहा है कि अगर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अपने सांसदों को नहीं रोक पाया, तो आगामी चुनाव में महायुति (BJP + शिंदे + अजीत पवार) की लहर के सामने उनका टिकना मुश्किल होगा। शिंदे गुट के मंत्री उदय सामंत पहले ही दावा कर चुके हैं कि उद्धव खेमे के कई विधायक उनके संपर्क में हैं।

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