MP Today Weather Update: मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी, 4 दिन और इंतजार, कई जिलों में लू तो कहीं बारिश का अलर्ट’

MP Today Weather Update: मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार अभी और लंबा खिंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून की एंट्री 25 जून के बाद होने की संभावना है। सामान्यतः मानसून 15 जून तक मध्य प्रदेश पहुंच जाता है, लेकिन इस बार 22 जून तक भी इसकी दस्तक नहीं हो सकी है। अगले चार दिनों तक प्रदेश में लू, तेज गर्मी, उमस और आंधी-बारिश का मिला-जुला मौसम बना रहने के आसार हैं। वहीं जून में अब तक सामान्य से 48 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई और खेती से जुड़े कई काम बारिश पर निर्भर हैं।

MP Today Weather Update: मध्य प्रदेश में मानसून (Monsoon) का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। सामान्य समय से पीछे चल रहे मानसून के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस (Humidity) लोगों को परेशान कर रही है। मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि प्रदेश में मानसून की एंट्री अभी कम से कम चार दिन और टल सकती है। इस बीच कुछ जिलों में लू (Heatwave) का असर बना रहेगा, जबकि कई क्षेत्रों में आंधी और बारिश (Thunderstorm & Rain) का दौर जारी रहने की संभावना है।

कई जिलों में लू का अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने सोमवार को नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। वहीं जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के कई जिलों में अगले चार दिनों तक गर्म हवाएं चलने और हीटवेव जैसी स्थिति बने रहने की आशंका जताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार दिन के समय तापमान अधिक रहने से लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जबकि शाम के समय मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

21 से ज्यादा जिलों में बारिश और तेज हवा की संभावना

एक ओर जहां प्रदेश का बड़ा हिस्सा गर्मी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर कई जिलों में आंधी और बारिश (Rain Alert) की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर समेत 21 से अधिक जिलों में तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

रायसेन में सबसे ज्यादा बारिश, भोपाल भी भीगा

रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। रायसेन जिले में सबसे अधिक 61 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो करीब ढाई इंच के बराबर है। राजधानी भोपाल में दोपहर बाद तेज बारिश हुई, जबकि सतना, जबलपुर, खजुराहो, नौगांव और सिवनी में भी बारिश का असर देखने को मिला।

तापमान में गिरावट, दतिया रहा सबसे गर्म

बारिश और बादलों की आवाजाही के कारण कई शहरों के तापमान (Temperature) में कमी दर्ज की गई। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि इंदौर में 37.1 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री और जबलपुर में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। वहीं ग्वालियर में पारा 39.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। दतिया प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

सामान्य समय से करीब 10 दिन पीछे मानसून

आमतौर पर मध्य प्रदेश में मानसून 15 जून तक दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार 22 जून तक भी इसकी एंट्री नहीं हो सकी है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मानसून पहले छत्तीसगढ़ की ओर आगे बढ़ेगा और इसके बाद 25 जून के आसपास मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। मानसून की धीमी गति के कारण प्रदेश में बारिश (Rainfall Deficit) का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

जून में सामान्य से 48 फीसदी कम बारिश

प्रदेश में जून महीने के दौरान अब तक सामान्य से 48 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है, जहां सामान्य वर्षा की तुलना में 69 प्रतिशत तक कमी रिकॉर्ड की गई है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 55 में से 45 जिले बारिश के मामले में सामान्य स्तर से पीछे चल रहे हैं, जिससे जलस्रोतों और कृषि गतिविधियों पर असर पड़ने लगा है।

किसानों की बढ़ी चिंता, बुवाई पर संकट

मानसून में देरी का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र (Agriculture) पर दिखाई दे रहा है। खरीफ सीजन (Kharif Season) की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में पर्याप्त नमी के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक है। इसके बिना बुवाई करना जोखिम भरा हो सकता है। कई जिलों में किसानों ने मानसून आने की उम्मीद में पहले ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी, लेकिन बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

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