Lung cancer को आमतौर पर सिगरेट पीने से जोड़कर देखा जाता है लेकिन यह सोच पूरी तरह से सही नहीं होती है।ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रिया एशपुनियानी के द्वारा दी जाने वाली जानकारी के अनुसार, धूम्रपान सबसे बड़ा रिस्क कारक में शामिल है। लेकिन बिना स्मोकिंग करने वाले लोगों को भी लंग कैंसर हो सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि लंग कैंसर स्मोकिंग सही हो उसके लिए प्रदूषण पैसिव स्मोकिंग खतरनाक पदार्थ आदि भी जिम्मेदार होते हैं।

Lung Cancer का कारण सिर्फ स्मोकिंग नहीं है
सिगरेट बीड़ी और दूसरे तंबाकू के प्रोडक्ट का सेवन करने से भी लंग कैंसर हो सकता है। लेकिन किसी व्यक्ति ने कभी भी धूम पर नहीं किया है इसका मतलब यह नहीं है कि उसे यह बीमारी कभी नहीं हो सकती। जानकारी के मुताबिक सेकंड हैंड स्मोक रेडॉन वायु प्रदूषण जैसे कारकों के संपर्क में आने से भी इसका रिस्क होता है।
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पैसिव स्मोकिंग और प्रदूषण भी चिंता की है वजह
दूसरे व्यक्ति के धुएं के संपर्क में आने को पैसे या सेकंड हैंड स्मोकिंग भी कहा जाता है लंबे समय तक इसका संपर्क भी Lung cancer की रिस्क से जुदा हो सकता है। इसके अलावा हवा में मौजूद प्रदूषण के कुछ औद्योगिक या कार्य स्थल से जुड़े पदार्थ के फेफड़े को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन भी सेकंड हैंड स्मोक एयर पॉल्यूशन और कार्य स्थल पर मौजूद कुछ हानिकारक पदार्थों को रिस्क समझता है।
आप किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
Lung cancer की शुरुआत में हमेशा स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता है लेकिन ऐसा जरूरी नहीं होता है हालांकि लगातार या बढ़ती हुई खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, खांसी के साथ खून आना आदि जैसे इसके संकेत होते हैं। बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना भी इसका लक्षण हो सकता है।
परिवार और जेनेटिक कारण भी है महत्वपूर्ण
कुछ लोगों में अनुवांशिक बदलाव या फिर परिवार के इतिहास में इस बीमारी के होने से यह रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए केवल किसी व्यक्ति की स्मोकिंग हिस्ट्री देखकर इसके रिस्क का अंदाजा नहीं लगना चाहिए।
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आप बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान
Lung cancer से बचाव के लिए सबसे जरूरी कदम धूम्रपान से दूर रहना होता है और अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो उसे छोड़ना होगा। सेकंड हैंड स्मोक से बचाना और प्रदूषण या कार्य स्थल के हानिकारक पदार्थों के संपर्क को कम करना भी बहुत जरूरी होता है।




