डॉक्टर्स ने की Junk Food ads रोकने की मांग, सेलिब्रिटी प्रमोशन पर भी सवाल..

Demand to ban junk food advertisements; questions raised over celebrity endorsements.

Avoid Junk Food; देश में जंक फूड खाने की लोकप्रियता इन दोनों बढ़ती जा रही है इसी बीच डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट ने इसके आक्रामक विज्ञापन पर सख्ती की मांग की बात की है। खास तौर पर बच्चे और युवा को प्रभावित करने वाले सेलिब्रिटी एडवर्टाइजमेंट, सोशल मीडिया के प्रमोशन और स्पॉन्सरशिप को लेकर डॉक्टर ने अपनी चिंता जताई है। डॉक्टर का कहना है कि विज्ञापन खान की पसंद को प्रभावित करते हैं।

Demand to ban junk food advertisements; questions raised over celebrity endorsements.

Junk Food के विज्ञापनों पर सख्ती की मांग क्यों?

डॉक्टर की चिंता ऐसे खाद्य और पीने के पदार्थ की मार्केटिंग को लेकर है जिसमे चीनी नमक या वसा की मात्रा काफी अधिक होती है। समस्या से टीवी के एडवर्टाइजमेंट तक ही सीमित नहीं है सोशल मीडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म्स खेल आयोजन और अन्य जगहों पर भी ऐसे प्रोडक्ट की ब्रांडिंग दिखाई देती है।

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इससे बच्चों पर पड़ सकता है ज्यादा असर

बच्चे और किशोर उम्र के बच्चों में Junk Food की मार्केटिंग का एक महत्वपूर्ण लक्षित समूह माना जाता है रिसर्च में पता चलता है कि इस तरह की विज्ञापन बच्चों की ब्रांड पहचान पसंद और खाने की मांग को भी काफी हद तक प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर बच्चों को सीधे या फिर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाने वाले एडवर्टाइजमेंट पर सख्त नियम चाहते हैं।

खास तौर पर सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट को लेकर चिंता

फिल्म स्टार खिलाड़ी और सोशल मीडिया की फेमस हस्ती किसी प्रोडक्ट को लोगों की भी ज्यादा भरोसेमंद और आकर्षक बना सकती हैं। खास तौर पर जब कोई खिलाड़ी किसी खाने के प्रोडक्ट या फिर पीने के ब्रांड से जुड़ा होता है तो उसे प्रोडक्ट और फिटनेस के बीच एक पॉजिटिव संबंध बनने की भावना दिखती है। रिसर्च में एथलीट के एडवर्टाइजमेंट को युवाओं की पसंद और प्रोडक्ट के प्रति नजरिए पर असर डालने वाला पाया गया है। यानी अगर कोई एथलीट किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन करता है तो लोग ज्यादा मात्रा में उसे खरीदने हैं चाहे वह प्रोडक्ट अच्छा हो या ना हो।

स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप भी ज्यादा चर्चा में

डॉक्टर की चिंता का एक बड़ा हिस्सा भारत स्पॉन्सरशिप को भी बताया जा रहा है खेल आम तौर पर फिटनेस और स्वस्थ जीवन शैली से जुड़े लोगों में होता है लेकिन जब इन्ही आयोजन से कम पोषण वाले खाद्य पदार्थों का प्रचार होने लगे तो यह एक गलत संदेश फैलता है। एक प्रकाशित विज्ञापन में भी खेलों से जुड़े विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप से युवाओं की खाद्य धारणा पर प्रभाव की चर्चा होती है।

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अब सिर्फ विज्ञापन नहीं, बेहतर नियमों की जरूरत

डॉक्टर के द्वारा ऐसी मांग करने का उद्देश्य केवल विज्ञापन को रोकना नहीं है बल्कि बच्चों के लिए एक स्वस्थ खाने पीने का वातावरण बनाना है। इसके लिए स्पष्ट पोषण की जानकारी गलत हेल्थ के दावों पर नियंत्रण और बच्चों के लिए लक्षित मार्केटिंग पर प्रभावी निगरानी बहुत जरूरी है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी नियम लागू होना चाहिए।

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