MP: लोकसभा में 33% महिला आरक्षण बिल गिरा, विपक्ष पर BJP प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल का तीखा हमला

Women Reservation Bill Fails: लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया, जिससे संसद में तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस पर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं के हितों के खिलाफ काम किया है और अपनी महिला-विरोधी मानसिकता उजागर कर दी है।

Women Reservation Bill Fails: लोकसभा में शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 (The Constitution 131st Amendment,Bill, 2026) मत विभाजन के बाद गिर गया। विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े जबकि विरोध में 230 वोट रहे। संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत (करीब 352 वोट) नहीं मिल पाने से यह विधेयक पारित नहीं हो सका। इस घटना ने संसद में तीखी बहस छेड़ दी है और राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

विधेयक का मकसद महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था, जिसे 2029 के लोकसभा चुनावों से जोड़ा जा रहा था। साथ ही परिसीमन (delimitation) से जुड़े प्रावधान भी इसमें शामिल थे।

भाजपा का आक्रामक रुख

मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विधेयक के गिरने पर विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने इसे महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को इस फैसले से गहरा झटका लगा है।

खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), डीएमके और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा, “यह विधेयक देश की आधी आबादी को राजनीतिक सशक्तिकरण देने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम था। विपक्ष ने अपनी महिला-विरोधी मानसिकता को उजागर कर दिया है।”

भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार लगातार इस दिशा में प्रयास कर रही है, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह महत्वपूर्ण कदम रुक गया।

विपक्ष की दलीलें

विपक्षी दलों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों और पूरी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार, बिल में शामिल परिसीमन और अन्य मुद्दों को लेकर स्पष्टता की कमी थी, जिसके चलते उन्होंने समर्थन नहीं किया। कुछ नेताओं ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे सही तरीके से लागू करने की जरूरत है। इस घटनाक्रम के बाद संसद परिसर में एनडीए सांसदों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। विपक्ष के कुछ नेताओं ने इस पर संतोष जताया, जबकि महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।

आगे क्या?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विशेष सत्र के दौरान तीन संबंधित विधेयकों पर चर्चा हुई थी, लेकिन संवैधानिक संशोधन वाले बिल के गिरने के बाद शेष विधेयक भी प्रभावित हुए।महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने का यह प्रयास फिलहाल अटक गया है, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी जारी है। सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जबकि विपक्ष प्रक्रिया और प्रावधानों में बदलाव की मांग कर रहा है।

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