Women Reservation Bill: देश की संसद में 17 अप्रैल को एक ऐतिहासिक घटना हुई. 11 साल से चल रही NDA सरकार द्वारा पेश किया गया विधेयक पहली बार पास नहीं हो पाया। केंद्र सरकार जानती थी कि लोकसभा सीटें बढ़ाने वाला बिल पास नहीं हो सकता क्योंकी उसके पास पर्याप्त 2/3 सांसदों का समर्थन नहीं है. इसके बावजूद सरकार ने बिल पेश किया और यह वोटों के आभाव में गिर गया. इसी के साथ लोकसभा सीटों में इजाफा करने की योजना धरी की धरी रह गई
सरकार के 3 बिल लोकसभा में पास क्यों नहीं हो सके?
दरअसल मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून को 2029 के चुनाव में लागू करना चाहती थी. और इसके लिए लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 तक करना चाहती थी मगर इसके लिए सविधान में संशोधन जरूरी था, और ऐसा करने के लिए परसीमन करना जरूरी था. इसके लिए सरकार 2011 की जनगणना को आधार पर महिला आरक्षण और परिसीमन लागू करने के लिए लोकसभा में तीन बिल लाई…
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
- परिसीमन विधेयक, 2026
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेश कानून में संशोधन के लिए सामान्य बहुमत की जरूरत थी, जिसके लिए सरकार को सिर्फ आधे से एक अधिक सांसदों के वोट चाहिए थे मगर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के लिए विशेष बहुमत की जरूरत थी। क्योंकि इसमें लोकसभा की अधिकतम सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करने, आर्टिकल 81 और 82 में बदलाव, और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का प्रावधान है।
सरकार को इसके लिए उपस्थित सांसदों का 2/3 बहुमत चाहिए था जैसे संसद में 528 सांसद थे तो वोट चाहिए थे 352 जबकि NDA के पास 293 सांसद हैं. सरकार ने 5 गैर NDA सांसदों के तो वोट हासिल कर लिए मगर विपक्ष के 233 सांसदों में से 230 ने बिल के खिलाफ वोटिंग कर दी.
केंद्र सरकार जानती थी कि ये बिल पास नहीं हो सकता, लेकिन यहां मामला ‘चिट भी मेरी पट भी मेरी’ वाला था. बिल पास होता तो भी केंद्र सरकार को क्रेडिट मिलता और बिल पास नहीं हुआ है तो विपक्ष की छवि महिला विरोधी हो गई है.
जब बिल गिरना था तो सरकार लाई ही क्यों
रिपोर्ट्स के अनुसार बीजेपी अब विपक्ष खासकर कांग्रेस को महिला आरक्षण कानून लागू न होने की नाकामी का दोष देगी, इसके लिए बड़ा कम्पैन शुरू करेगी। बीजेपी इसे तमिलनाडु और बंगाल के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकती है जहां महिला वोटर्स काफी अहम हैं. ,बीजेपी यहां नैरेटिव बनाएगी कि हमने तो कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने महिलाओं का हक और परिसीमन में रुकावट पैदा कर दी।
अब सरकार क्या करेगी
- सरकार बिल में कुछ बदलाव कर सकती है। जैसे- दक्षिणी राज्यों की सीटों की हिस्सेदारी बढ़ाने या फ्रीज रखना का प्रावधान, 2011 की बजाय 2027 की जनगणना का आधार। इसके बाद नए सिरे से बिल पेश कर सकती है।
- सरकार विपक्ष के साथ आम सहमति बना सकती है और उसके कहे बदलावों को शामिल कर सकती है। इसके बाद विपक्ष के समर्थन से बिल पास करा सकती है।
- सरकार सामान्य तरीके से 2027 की जनगणना पूरी होने के बाद परिसीमन करवा सकती है। फिर इसी परिसीमन के हिसाब से महिला आरक्षण लागू कर सकती है।
