नोएडा। उत्तर-प्रदेश की योगी सरकार ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लेते हुए जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने का प्रस्ताव पारित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम के नाम का ऐलान करते हुए यह जानकारी दिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्याे की प्रशंसा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में 500 वर्षों का इंतजार खत्म हुआ है। उन्होने कहा कि यूपी में काशी का कॉरिडोर समेत अनेकों ऐसे उदाहरण है, जो कि पीएम मोदी की इच्छा शक्ति के परिणाम है।
क्या है जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय विमान क्षेत्र, जिसे जेवर विमान क्षेत्र और आधिकारिक ढंग से नोएडा अंतर्राष्ट्रीय ग्रीनफ़ील्ड विमान क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है। उत्तर प्रदेश के गौतम बौद्ध नगर में जेवर नगर के पास यह अंतरराष्ट्रीय विमान क्षेत्र है। विमान क्षेत्र को सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल (पीपीपी) के साधन विकसित किया जा रहा है।
2021 में शुरू हुआ था निर्माण
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जेवर विमान क्षेत्र की आधारशिला 25 नवंबर 2021 को रखी थी। इस पूरी परियोजना के लिए 5100 हेक्टेयर की पहचान की है जिसमे से 240 हेक्टेयर राज्य शासन के अंतर्गत आता है और शेष निजी संस्थाओं के स्वामित्व में है। 1327 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पहले चरण में टर्मिनल भवनों और रनवे के निर्माण के लिए किया गया। यह इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विमान क्षेत्र और हिंडन में एक क्षेत्रीय विमान क्षेत्र के पश्चात् दिल्ली-एनसीआर में तीसरा वाणिज्यिक विमान क्षेत्र होगा और उत्तर प्रदेश राज्य का पाँचवाँ अंतर्राष्ट्रीय विमान क्षेत्र होगा।
2001 में लाया गया था प्रस्ताव
यह परियोजना पहली बार 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा यमुना एक्सप्रेसवे से सटे ग्रेटर नोएडा के पास जेवर गांव में एक ग्रीनफील्ड ताज इंटरनेशनल और एविएशन हब के रूप में प्रस्तावित की गई थी। इसे ग्रेटर नोएडा मार्ग से नोएडा मेट्रो से जोड़ने का प्रस्ताव है और दिल्ली मेट्रो से फरीदाबाद, बल्लभगढ़,पलवल ,जेवर मार्ग और ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 21 में प्रस्तावित फिल्म सिटी परियोजना में सम्मिलित मनोरंजन पार्क से चालक रहित पॉड टैक्सी या व्यक्तिगत रैपिड ट्रांजिट से जोड़ा जा रहा है। भारत की उच्च गति गामिनी परियोजना में सम्मिलित प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी-कोलकाता एचएसआर लाइन में विमानक्षेत्र के पास एक उच्च गति लौह पथ गामिनी गृह होगा।
एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट
- नेट-जीरो एमिशन (Net-Zero Emissions): यह भारत का पहला नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला आधुनिक हवाई अड्डा होगा।
- यात्री क्षमता: पहले चरण में इसकी सालाना यात्री क्षमता लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) है। चार चरणों के विकास के बाद इसकी क्षमता और बढ़ाई जाएगी।
- एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट: चारों चरणों का काम पूरा होने के बाद यह एशिया के सबसे बड़े और दुनिया के प्रमुख हवाई अड्डों में शामिल होगा।
- बड़ी संख्या में रनवे: भविष्य में इसमें 6 रनवे बनने की योजना है, जो इसे भारत में सबसे अधिक रनवे वाले हवाई अड्डों में शामिल करेगा।
- दिल्ली-एनसीआर पर भार कम करना: यह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर यात्रियों और उड़ानों के भारी दबाव को कम करने के लिए बनाया गया है।
- मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी: यह यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और भविष्य में मेट्रो और हाई-स्पीड रेल से जुड़ने के कारण बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।




