MP: ईरान-अमेरिका युद्ध का एमपी पर असर, चावल, केला, टेक्सटाइल और फार्मा निर्यात पर संकट, करोड़ों का नुकसान

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Impact of Iran-US war on MP: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध जैसी स्थिति का असर अब मध्य प्रदेश के निर्यात कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है, जहां लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में अनिश्चितता और सुरक्षा चुनौतियों के कारण चावल, केला, टेक्सटाइल तथा फार्मास्यूटिकल उत्पादों की शिपमेंट बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे माल भेजने में भारी देरी, मालभाड़े में 60-100 प्रतिशत तक की वृद्धि, घरेलू बाजार में कीमतों में 10-40 प्रतिशत तक की गिरावट और कुल मिलाकर मध्य पूर्वी देशों को जाने वाले करीब 782 करोड़ रुपये के निर्यात पर गहरा संकट मंडरा रहा है, जिससे कारोबारियों, निर्यातकों और किसानों की चिंता बढ़ गई है।

Impact of Iran-US war on MP: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध से खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अब मध्य प्रदेश के निर्यात कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में अनिश्चितता और सुरक्षा चुनौतियों के कारण राज्य से चावल, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स और केला जैसे उत्पादों की शिपमेंट बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे माल भेजने में देरी, मालभाड़ा में भारी वृद्धि और बाजार में कीमतों में गिरावट जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

व्यापारियों के अनुसार, इन परिस्थितियों से मध्य पूर्वी देशों को भेजे जाने वाले करीब 782 करोड़ रुपये के निर्यात पर सीधा असर पड़ा है। लाल सागर क्षेत्र में अस्थिरता के चलते समुद्री परिवहन धीमा पड़ गया है, जिससे सामान की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

4 लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों पर फंसा

मध्य प्रदेश से अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच बासमती चावल का निर्यात करीब 4,064 करोड़ रुपये का रहा। मार्च 2025 में ही 338 करोड़ रुपये का चावल निर्यात किया गया था, लेकिन युद्ध के कारण पिछले एक सप्ताह से निर्यात लगभग रुक गया है। अनुमान है कि करीब 4 लाख टन बासमती चावल फिलहाल फंसा हुआ है, जिससे घरेलू बाजार में दबाव बढ़ गया है।

किसानों के मुताबिक, पिछले सप्ताह तक 4,400 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला चावल अब घटकर करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। यानी बाजार में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ऑल इंडिया एक्सपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालातों से बासमती चावल के निर्यात पर टैक्स बढ़ गया है और शिपिंग लागत कई गुना हो चुकी है। निर्यातकों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ रहा है। कई निर्यातकों ने फिलहाल माल भेजना रोक दिया है, क्योंकि रास्ते में फंसने से भारी नुकसान का खतरा है।

बड़वानी के केले का निर्यात ठप, भाव 40% तक गिरा

बड़वानी जिले का केला अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। नर्मदा नदी के किनारे की उपजाऊ भूमि और अच्छी सिंचाई से यहां के केले का स्वाद और आकार खास होता है। हर साल बड़ी मात्रा में केला ईरान, इराक, इजराइल, बहरीन, तुर्की और दुबई जैसे मध्य पूर्वी देशों में निर्यात होता रहा है।

लेकिन हालिया तनाव से निर्यातकों और किसानों की आमदनी पर बुरा असर पड़ा है। बंदरगाहों पर माल अटकने और मांग घटने से कीमतों में तेज गिरावट आई है। पहले 2,000 से 2,200 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला भाव अब घटकर 1,200 से 1,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। निर्यातकों का कहना है कि बड़वानी से केले का निर्यात 2016 से शुरू हुआ था और पिछले साल करीब 1.6 लाख टन केला विदेश भेजा गया। इस साल जिले में ढाई से तीन करोड़ केले के पौधे लगाए गए हैं, लेकिन बाजार की सुस्ती से किसान चिंतित हैं।

टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर की चाल धीमी

राज्य से कपास धागे और टेक्सटाइल का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच टेक्सटाइल निर्यात लगभग 7,940 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल निर्यात का करीब 12 प्रतिशत है। इसी अवधि में रेडीमेड गारमेंट्स का निर्यात करीब 527 करोड़ रुपये रहा। उद्योग संगठनों का कहना है कि समुद्री मार्गों में व्यवधान और शिपमेंट में देरी से कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

फार्मा निर्यात पर मालभाड़ा का बोझ

दवाइयों और फार्मास्यूटिकल उत्पादों के निर्यात पर भी संकट मंडरा रहा है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच राज्य से फार्मा निर्यात करीब 13,830 करोड़ रुपये का रहा, जो कुल निर्यात का लगभग 21 प्रतिशत है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्री मालभाड़ा 60 से 100 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिससे लॉजिस्टिक लागत में भारी इजाफा हुआ है। इससे प्रदेश की फार्मा कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा क्षमता 3 से 5 प्रतिशत तक कम होने की आशंका है।

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