रीवा। 7 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इस अवसर पर टीआरएस महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा संवाद कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में महिलाओं की वर्तमान स्थिति, उनके अधिकारों, शिक्षा, समान अवसर तथा महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न सामाजिक पहलुओं पर चर्चा की गई।
महिलाओं के अधिकारों को करना है जागरूक
टीआरएस के प्रो. डॉक्टर अखिलेश शुक्ल ने संवाद कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालाते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और समान अवसरों के प्रति समाज को जागरूक करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि आज के समय में महिलाओं की भूमिका समाज के प्रत्येक क्षेत्र में बढ़ती जा रही है, फिर भी लैंगिक असमानता, सामाजिक रूढ़ियाँ और अवसरों की कमी जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। ऐसे में आवश्यक है कि समाज में संवाद, शिक्षा और संवेदनशीलता के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी यदि समानता और सम्मान के मूल्यों को अपनाए तो समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है।
महिलाओं से समाज की प्रगति संभव
डॉ. महानन्द द्विवेदी ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि किसी भी समाज की प्रगति का वास्तविक मापदंड वहाँ की महिलाओं की स्थिति से निर्धारित होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास महिलाओं के सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण आधार हैं। जब समाज महिलाओं को समान अवसर प्रदान करता है, तभी वह समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि आज की महिलाएँ शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, राजनीति, साहित्य और सामाजिक सेवा जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही है और वर्तमान समय में यह और अधिक सशक्त रूप में सामने आ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान, समान अधिकार और गरिमा की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. शाहिदा सिद्दीकी, डॉ. फरजाना बानो, डॉ. प्रियंका पांडे, डॉ. निशा सिंह, डॉ. गुंजन सिंह, डॉ. प्रियंका तिवारी एवं योगेश निगम ने सक्रिय सहभागिता करते हुए महिला सशक्तिकरण, शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी, सामाजिक समानता और लैंगिक संवेदनशीलता जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि समाज में महिलाओं की स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए शिक्षा, जागरूकता और सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।




