भारत में है 43 विश्वस्तरीय धरोहर स्थल, विश्व में छठा सबसे बड़ा समूह

विश्व धरोहर दिवस। प्रति वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। 2026 तक, भारत में 43 विश्व धरोहर स्थल हैं (35 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक, 1 मिश्रित), जो विश्व में छठा सबसे बड़ा समूह है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि ये स्मारक सिर्फ पुरानी इमारतें नहीं हैं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास की कहानी और हमारी सामूहिक पहचान है।

इस लिए मनाया जाता है विश्व धरोहर दिवस

विश्व धरोहर दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के महत्व, उनके संरक्षण और सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है। यह दिन मानव इतिहास, स्मारकों और ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा करने की सामूहिक जिम्मेदारी को याद दिलाने के लिए मनाया जाता है। इनकी सुरक्षा और संरक्षण करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस भावना को मजबूती देने और विश्व धरोहर स्थलों के महत्व तथा भावी पीढ़ियों के लिए उनकी सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने प्रतिवर्ष विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है।

1982 से मनाया जा रहा विश्व धरोहर दिवस

1982 में, अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद ने 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस के रूप में नामित किया, जिसे एक वर्ष बाद, 1983 में, यूनेस्को की महासभा द्वारा अनुमोदित किया गया। इस दिवस का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत, स्मारकों के महत्व और इन सभी के संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व धरोहर स्थल वे अद्वितीय सांस्कृतिक या प्राकृतिक स्थल हैं, जिनका मानवता के लिए असाधारण मूल्य है और जिन्हें 1972 के कन्वेंशन के तहत संरक्षित किया जाता है।

भारत के प्रमुख विश्व धरोहर स्थल :

ऐतिहासिक स्थलः ताजमहल (आगरा), आगरा का किला, अजंता-एलोरा की गुफाएं (महाराष्ट्र), सूर्य मंदिर (कोणार्क), महाबलीपुरम के स्मारक, साँची स्तूप।
राजस्थान के पहाड़ी किलेः आमेर किला, चित्तौड़गढ़ किला, कुंभलगढ़ किला, रणथंभोर किला, गागरोन किला, जैसलमेर किला।
प्राकृतिक स्थलः काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम), केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिमी घाट, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क।
नवीनतम शामिलः 2024 में असम के मोइदम्स (अहोम राजवंश की टीलेनुमा कब्रें) को शामिल किया गया है।

विश्व धरोहर दिवस के प्रमुख उद्देश्य और महत्वः

जागरूकता फैलानाः दुनिया भर में मौजूद ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों के महत्व के बारे में जनता को शिक्षित करना।
संरक्षण की आवश्यकताः तेजी से शहरीकरण, प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खतरे में पड़े स्थलों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करना।
भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षाः अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासतों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना।
अंतर्राष्ट्रीय संधिः यह दिवस इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (प्ब्व्डव्ै) द्वारा 1982 में शुरू किया गया और 1983 में यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त की गई।
सांस्कृतिक धरोहर का जश्नः इस दिन विभिन्न देशों की विविध सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक स्थलों का जश्न मनाया जाता है।

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