‘हिंदुत्व नफरत फैलाता है’, दिग्विजय सिंह के बयान से Akhilesh Yadav के PDA पर फिरा पानी

Is Akhilesh Yadav PDA safe : हिंदुत्व सिर्फ नफरत फैलाता है… हिंदुत्व सनातन धर्म का हिस्सा ही नहीं है… ये हम नहीं कह रहे, ये बोल हैं कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के हैं।

अभी पीएम मोदी का अपमान करने वाले मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर विवाद थमा ही नहीं कि अब कांग्रेस के सामने नया विवाद खड़ा हो गया है। जहां पहले ही मल्लिकार्जुन खरगे के ‘बाप वाले बयान’ पर कांग्रेस को भाजपा ने चौतरफा घेर लिया है, वहीं अब कांग्रेस को दिग्विजय सिंह के ‘हिंदुत्व नफरत फैलाता है’ वाले बयान पर अपना हिंदुत्व नैरेटिव जनता के सामने समझाना पड़ेगा।

इन दिनों कांग्रेस के सामने उसकी ही टीम के नेताओं ने विवादों की ऐसी झड़ी लगा दी है कि पार्टी उन्हें सुलझा ही नहीं पा रही। अब तक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जैसे बड़े पद पर बैठे नेता द्वारा देश के प्रधानमंत्री के लिए ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ जैसे अपशब्द का इस्तेमाल करना देश में कांग्रेस के खिलाफ नकारात्मक विचारधारा बना रहा है। और अब दिग्विजय सिंह के हिंदुत्व के अस्तित्व पर सवाल खड़े करने वाले बयान के बाद ये विवाद महज एक धर्म पर की गई अभद्र टिप्पणी नहीं है, बल्कि सियासी विवाद बनकर मध्य प्रदेश से सीधे उत्तर प्रदेश की राजनीति में असर डालेगा।

दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन पर क्या कहा?

कांग्रेस नेता का ये बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त कांग्रेस के गठबंधन दल समाजवादी पार्टी अयोध्या से अपने हिंदुत्व नैरेटिव को सुधारने का प्रयास कर रही है। तो ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस के नेताओं के इन बयानों से यूपी के चुनाव में सपा को नुकसान होगा? क्या कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने से सपा की PDA में सवर्णों को जोड़ने की योजना पर पानी फिर जाएगा?

तो आपने सुना, दिग्विजय सिंह ने साफ तौर पर कहा है कि हिंदुत्व सनातन धर्म नहीं है, हिंदुत्व तो सिर्फ नफरत फैलाता है। उन्होंने सनातन धर्म की परिभाषा भी समझाई और कहा कि सनातन धर्म तो सर्वधर्म समभाव और अहिंसा का मार्ग है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व और सनातन धर्म एक नहीं, बल्कि दो विपरीत ध्रुव हैं। आज जिस हिंदुत्व का ढोल पीटा जा रहा है, उसका एकमात्र मकसद समाज में नफरत का जहर घोलना है। उन्होंने ये भी दावा किया कि वो सनातन धर्म की पुनः स्थापना करेंगे।

दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा ने ‘हिंदुत्व’ और ‘सनातन’ की एक बिल्कुल नई परिभाषा जनता के सामने रख दी है, जो भाजपा को सीधे कटघरे में खड़ा करती है। दिग्विजय सिंह ने ये बयान सोमवार को मध्य प्रदेश के सारंगपुर में आयोजित सत्य सनातन यात्रा के बाद एक प्रेस वार्ता में दिया।

ऐसा भी नहीं है कि दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म पर पहली बार इस तरह का बयान दिया है। इससे पहले भी वो हिंदुत्व और सनातन की परिभाषा समझा चुके हैं और भाजपा पर देश के सनातनियों को गुमराह करने का आरोप भी लगा चुके हैं।

भाजपा ने दिग्विजय सिंह पर किया पलटवार

अब दिग्विजय सिंह के इस बयान से सियासी विवाद फिर छिड़ गया है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के इस बयान पर मध्य प्रदेश के भाजपा मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार किया है और कांग्रेस को आईना दिखाते हुए कहा है कि दिग्विजय सिंह खुद ही बताएं कि क्या वो हिंदू हैं? और क्या वो सनातन को बदनाम करने के लिए यात्रा निकाल रहे हैं?

उन्होंने कांग्रेस को ललकारते हुए कहा कि कांग्रेस अब अपना उद्देश्य साफ-साफ जनता को बता दे। जिस तरह कांग्रेस रोज एक नया विवाद खड़ा कर रही है, वो पूरी दुनिया में हिंदुत्व और सनातन के खिलाफ संदेश दे रही है कि कांग्रेस ने सनातन को बदनाम करने की सुपारी ली है। यहां उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के लिए हिंदुत्व को बदनाम करने की इस तरह की स्क्रिप्ट ज़ाकिर नायक लिख रहे हैं।

यूपी में सपा की PDA रणनीति पर असर?

भाजपा के इन आरोपों के बाद ये कहा जा सकता है कि कांग्रेस चारों तरफ से घिर गई है। लेकिन सवाल सिर्फ कांग्रेस के बयानों का नहीं है; सवाल उत्तर प्रदेश की उस सियासत का भी है, जहां 2027 में अखिलेश यादव बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

अब कांग्रेस के सामने एक तरफ तो खुद की छवि सुधारने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में अपने सहयोगी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के नए PDA को दागरहित बनाना है। क्योंकि हिंदुत्व के मुद्दे पर अगर कांग्रेस के दामन पर छींटे पड़ें, तो यूपी चुनाव में सपा भी इस दाग से खुद को बचा नहीं पाएगी। और अखिलेश यादव की PDA में ‘P’ फॉर पंडित वाली योजना पर भी पानी फिर सकता है।

अखिलेश यादव अपने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने के साथ-साथ अब इसमें सवर्णों को जोड़ रहे हैं, ताकि विधानसभा चुनाव में धर्मनगरी अयोध्या में सपा का झंडा फहरा सके। तो ऐसे में कांग्रेस के नेताओं के बयान विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर असर डाल सकते हैं। क्योंकि यूपी में अखिलेश यादव कांग्रेस को 174 सीटें देने की घोषणा कर चुके हैं। तो जाहिर है, अखिलेश यादव को हिंदुत्व पर कांग्रेस की खराब छवि का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

सपा के सामने चार संभावित चुनौतियां

पहला, अखिलेश यादव के ब्राह्मणों को जोड़ने की कोशिश को झटका लग सकता है, क्योंकि हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर कांग्रेस नेताओं के विवादित बयानों का इस्तेमाल बीजेपी उसके खिलाफ कर सकती है।

दूसरा, यूपी में बीजेपी अखिलेश यादव के राम मंदिर दर्शन करने जाने के फैसले पर उन्हें घेर सकती है। भाजपा सवाल कर सकती है कि एक तरफ अखिलेश की सहयोगी कांग्रेस हिंदुत्व को नफरत फैलाने वाला बता रही है, तो दूसरी तरफ खुद सपा प्रमुख वोट पाने के लिए रामलला के दर्शन करने का ढोंग रच रहे हैं।

तीसरा, बीजेपी अखिलेश यादव के PDA की नई परिभाषा को चुनौती दे सकती है कि PDA का राजनीतिक आधार केवल पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग ही हैं, सवर्ण नहीं।

सपा के सामने चौथा संकट ये होगा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन अखिलेश के लिए कहीं हार का कारण न बन जाए।

क्या कांग्रेस के बयान बढ़ाएंगे अखिलेश की मुश्किलें?

यूपी के सियासी गलियारों में अब ये सवाल उठ सकते हैं कि क्या कांग्रेस नेताओं के बयान यूपी में अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं? क्या कांग्रेस के साथ गठबंधन करने पर समाजवादी पार्टी की PDA रणनीति के साथ सवर्ण मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश नाकामयाब हो जाएगी?

यह भी पढ़े : Akhilesh Yadav Visit Ram Mandir : अखिलेश यादव के रामलला के दर्शन के बाद क्या 2027 में PDA से जुड़ेंगे ब्राह्मण वोट?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *