रीवा: डिप्टी सीएम ने किया प्राकृतिक खेती कार्यशाला का शुभारंभ, कहा- ‘धरती और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए यह समय की मांग’

Deputy CM Rajendra Shukla inaugurates natural farming workshop.


रीवा। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने आज रीवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में ‘प्राकृतिक खेती’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने किसानों को आधुनिक युग में प्राकृतिक खेती के महत्व और उसकी अनिवार्यता से रूबरू कराया।

‘धरती माता और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए जरूरी है प्राकृतिक खेती’
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने प्राकृतिक खेती को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों के बढ़ते प्रयोग से हमारी सेहत और जमीन दोनों को भारी नुकसान हो रहा है। अगर हम प्राकृतिक खेती को अपनाते हैं, तो इससे न केवल हमारा स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि हमारी धरती माता की उर्वरा शक्ति और स्वास्थ्य भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

किसानों से खास अपील: ‘कम से कम परिवार के लिए तो शुरू करें शुरुआत’
उपमुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद अन्नदाताओं से एक भावुक और महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने आग्रह किया कि बड़े पैमाने पर न सही, लेकिन हर किसान भाई कम से कम अपने परिवार की दैनिक जरूरतों और उपभोग के लिए अपने खेतों के एक हिस्से में प्राकृतिक तरीके से अन्न उत्पादन की शुरुआत अवश्य करें। इससे आने वाली पीढ़ी को केमिकल-मुक्त और पौष्टिक आहार मिल सकेगा।

पीएम मोदी और गृह मंत्री भी कर चुके हैं रीवा के मॉडल की सराहना
डिप्टी सीएम ने रीवा में हो रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि क्षेत्र के बसामन मामा गौवंश वन्य विहार और हिनौती गौधाम में प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि रीवा के इस बेहतरीन मॉडल की सराहना खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कर चुके हैं।

कार्यशाला में कई दिग्गज नेता और सैकड़ों किसान रहे मौजूद
इस गरिमामयी कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों का जमावड़ा रहा। कार्यशाला में मुख्य रूप से सांसद जनार्दन मिश्र, भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पांडेय सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और जिलेभर से आए बड़ी संख्या में जागरूक कृषक बंधु उपस्थित रहे, जिन्होंने प्राकृतिक खेती की बारीकियों को समझा।

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