जबलपुर-बनारस मार्ग। भारत सरकार के हाई-स्पीड इकोनॉमिक कॉरिडोर फेज-2 के तहत बनने जा रहे जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच का सफर बेहद आसान और तेज होने वाला है। लगभग 30,000 करोड़ की लागत से बनने वाले इस 4-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर के पूरा होने के बाद जबलपुर से बनारस की दूरी मात्र 5 से 6 घंटे में तय की जा सकेगी, जो वर्तमान में 10 से 12 घंटे में पूरी हो रही है।
480 किमी का है सफर
दरअसल वर्तमान 2-लेन मार्ग से 460-480 किलोमीटर का सफर तय करने में करीब 10 से 12 घंटे का समय लग रहा है। बताया जाता है कि हाई-स्पीड इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह सफर घटकर सिर्फ 5 घंटे का रह जाएगा, क्योंकि वाहनों की रफ्तार इस एक्सप्रेसवे पर वाहन 100 से 120 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ सकेंगे। यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के महाकौशल और विंध्य क्षेत्र से होकर उत्तर प्रदेश को जोड़ रहा है।
आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व धार्मिक पर्यटन
दो बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक शहरों (संस्कारधानी जबलपुर और बाबा विश्वनाथ की नगरी बनारस) के बीच कनेक्टिविटी सुगम होगी। यह कॉरिडोर वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत और समय दोनों घटेंगे।
ये शहर होंगे सीधे कनेक्ट
जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे के जरिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इनमें जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। यह रूट मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र से शुरू होकर विंध्य क्षेत्र के रास्ते उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तक पहुंचेगा। कॉरिडोर रीवा-सतना बेल्ट के साथ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और प्रयागराज के बाहरी हिस्सों को टच करते हुए वाराणसी रिंग रोड से जुड़ेगा।




