नईदिल्ली। जिस जमीन के लिए 15 सालों सें प्रधानमंत्री मोदी के स्कूल साथी असगरअली वोहरा परेशान थें। उस जमीन को पाने के लिए आखिरकार उन्हे पीएम मोदी के पास जाना पड़ा और मिंटो में उनकी जमीन उन्हे वापस मिल गई। महाराष्ट्र में ठाणे के मीरा रोड में रहने वाले 81 साल के असगरअली वोहरा को पीएम मोदी से मुलाकात के 8 दिन बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने उनसे जुड़ी विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और कंस्ट्रक्शन परमिट सरेंडर करने की बात कही है।
वोहरा का दावा पीएम मोदी के है सहपाठी
वोहरा का दावा है कि गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में पीएम मोदी के साथ पढ़ते थे। वे 8 सितंबर को प्रधानमंत्री से मुलाकात करके जमीन विवाद में दखल देने और सीबीआई जांच की मांग किए थें। पीएम से मुलाकात के बाद मामले में गतिविधियां शुरू हुईं। इस मामले में न सिर्फ नगर-निगम ने सभी को तलब किया था बल्कि उससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री के पीएस ने इस मामले को लेकर मंत्रालय में सभी बुलाया और मामले को सुलझा लिया।
पीछे हटी कंपनी, कागजात की सरेंडर
जो जानकारी आ रही है उसके तहत जमीन विवाद मामले में बैठक के बाद कंपनी प्रबंधन ने इस मामले में पूरी तरह से पीछे हटने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि कंपनी ने सभी कागजात सरेंडर कर दिए है। इतना ही नही विधायक नरेंद्र मेहता ने पुलिस कमिश्नर को अलग लेटर भेजा। इसमें उन्होंने वोहरा और उनके सहयोगी अजय ढोका के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है।
15 सालों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे थें वोहर
वोहरा के मुताबिक, जमीन को लेकर वह करीब 15 साल से अलग-अलग सरकारी विभागों के सामने मामला उठा रहे थे। उनका आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन को दो कंपनियों के बीच बांट दिया गया। इन कंपनियों के नाम स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस हैं। वोहरा ने दोनों कंपनियों को नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया था। इस मामले में 2015 में एफआईआर भी दर्ज हुई थी।




