Anaemia बीमारी के बारे में तो आपको पता ही होगा आज दुनिया की सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बीमारी एनीमिया की बीमारी है। भारत में खास तौर पर महिलाओं किशोर उम्र की लड़कियों और बच्चों में इसके मामले ज्यादातर देखने को मिल जाते हैं। डॉक्टर का कहना है कि केवल हीमोग्लोबिन लेवल कम होना समस्या नहीं होता है बल्कि यह जानना ज्यादा जरूरी है कि आखिर एनीमिया किस कारण से आपको हुआ है। सही समय पर जांच और करण के अनुसार इलाज करने से मरीज जल्द से जल्द ठीक हो सकता है।

Anaemia सिर्फ आयरन की कमी नहीं, अन्य कई कारण भी
अक्सर बहुत सारे लोग मान लेते हैं कि एनीमिया यानी शरीर में आयरन की कमी होना ही होता है लेकिन वास्तव में डॉक्टर के मुताबिक हर मरीज में इसकी वजह एक जैसी नहीं होती है। कई बार विटामिन b12 या फोलिक एसिड की कमी, लंबे समय से चल रही बीमारी, किडनी की समस्या इंफेक्शन, अनुवांशिक बीमारी होने के कारण कब एनीमिया बीमारी हो सकती है इसलिए बिना जांच के सिर्फ आयरन की दवा लेना एनीमिया में सही नहीं होता है।
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समय पर Anaemia जांच क्यों है सबसे जरूरी
डॉक्टर के अनुसार अगर शुरुआत में ही एनीमिया की पहचान हो जाती है तो इसके पीछे छिपी गंभीर बीमारी का भी पता चल सकता है। इसके लिए डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर अन्य भी कई सारे जांचकरवाते हैं। सही कारण सामने आने के बाद इलाज भी ज्यादा प्रभावित होता है और बीमारी दोबारा होने का खतरा काफी हद तक काम हो जाता है।
आपको किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
एनीमिया की बीमारी में अगर आपको लगातार थकान रहना, शरीर में कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना, सांस फूलना, चेहरा पीला पड़ना और दिल की धड़कन तेज होना आदि जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो यह सभी एनीमिया के सामान्य लक्षण है। अगर आपको ऐसा महसूस होता है तो डॉक्टर से जरूर दिखाना चाहिए।
भारत में Anaemia अब भी बड़ी स्वास्थ्य की चुनौती
हमारे देश भारत में महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया की समस्या काफी हद तक देखने को मिलती है डॉक्टर का मानना है कि सिर्फ आयरन की गोलियां बांटना ही पर्याप्त समाधान नहीं है। लोगों को संतुलित आहार पोषण संबंधित जानकारी और समय-समय पर हेल्थ संबंधित जांच की सुविधा मिलना भी उतना ही जरूरी होता है। इससे बीमारी की सही वजह का पता लगाकर बेहतर इलाज मिल सकता है।
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इसपर डॉक्टर की क्या है सलाह
डॉक्टर का कहना है कि एनीमिया की हर मरीज का इलाज उसकी बीमारी के कारण के अनुसार ही होना चाहिए। बिना जांच के दवा लेने से असली समस्या में दिक्कत हो जाती है और इलाज में भी देरी होने लगती है। इसलिए किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी होता है।




