भारत सरकार ने एक बार फिर Cervical Cancer हो पब्लिकली स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ आयोजित कार्यक्रम में बताया कि देश में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए टीकाकरण समय पर जांच होना और एक बेहतर तरीके का इलाज होने पर लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं और किशोरियों को स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।

Cervical Cancer की रोकथाम के लिए चार प्रमुख प्लान
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जीप नड्डा ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर से निपटने के लिए भारत चार प्रमुख प्लानिंग पर काम कर रहा है। इनमें बीमारियों की रोकथाम नियमित स्क्रीनिंग समय पर पहचान और सही इलाज आदि शामिल है सरकार का मानना है कि इन चारों पहलुओं पर एक साथ काम करने से सर्वाइकल कैंसर के मामले और इससे होने वाली म्यूट में कमी लाई जा सकती है।
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देशभर में करोड़ों महिलाओं की हुई है स्क्रीनिंग
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक देश में 8.6 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर के लिए स्क्रीनिंग हो चुकी है। 30 से 65 साल की महिलाओं के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर और अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच की सुविधा की उपलब्ध कराई गई है। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर इलाज आसान और ज्यादा प्रभावि हो जाता है।
HPV टीकाकरण अभियान पर सरकार का होगा विशेष फोकस
सरकार ने किशोर उम्र की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए बड़े लेवल पर एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत लगभग 1.2 करोड़ 14 साल की लड़कियों को मुफ्त एचपीवी वैक्सीन देने का लक्ष्य रखा गयाहै। एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण होता है इसलिए समय पर टीकाकरण भविष्य में बीमारी के रिस्क को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
WHO के 90-70-90 लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में किया प्रयास
भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के 9070 90 लक्ष्य के प्रति भी अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इसके बाद 90% लड़कियों का एचपीवी टीकाकरण 70% महिलाओं की स्क्रीनिंग और 90% पेशेंट को समय पर इलाज मिल पाएगा इसका लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि राज्य स्वास्थ्य संस्थान और समुदाय की भागीदारी से इस लक्ष्य को हासिल करने पर काम किया जा रहा है।
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जागरूकता बढ़ाना भी है बड़ी चुनौती
डॉक्टर के अनुसार केवल टीकाकरण और स्क्रीनिंग ही पर्याप्त ऑप्शन नहीं होता है बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी बहुत जरूरी है ग्रामीण और दूर के क्षेत्र में महिलाओं की नियमित तरीके से जांच और एचपी की वैक्सीन के महत्व के बारे में जानकारी देना इस अभियान की सफलता बताई जा रही है।




