शिवपुरी। .ऐतिहासिक नरवर किले से सिंधिया रियासत काल की करीब 400 वर्ष पुरानी और लगभग 3500 किलो वजनी ऐतिहासिक तोप चोरी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। चोरों ने पूरी योजना के साथ वारदात को अंजाम दिया। पहले तोप को गद्दों और रजाइयों में लपेटा, फिर बैरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से करीब तीन हजार फीट नीचे उतारकर लोडिंग वाहन में रखकर फरार हो गए।
घर चले गए थें गार्ड
जांच के दौरान यह जानकारी आ रही है कि घटना वाली रात किले पर तैनात दोनों सुरक्षा गार्ड ड्यूटी छोड़कर अपने-अपने घर चले गए थे। सुरक्षा गार्ड बालकिशन वाल्मीकि ने स्वीकार किया कि किले पर रात में रुकने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वहां न टॉर्च उपलब्ध थी और न ही अन्य सुरक्षा संसाधन, इसलिए वह घर चला गया था। दूसरे गार्ड शरणलाल जाटव ने भी माना कि घटना के समय वह ड्यूटी पर मौजूद नहीं था।
मौके पर पहुचे अधिकारी
राज्य पुरातत्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके से गद्दे, रजाई, लोहे के पाइप, तोप को घसीटकर ले जाने के निशान और किले के पिछले रास्ते पर भारी वाहन के टायरों के निशान मिले हैं। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है। राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया के अनुसार ऐतिहासिक तोप चोरी होने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं और पुलिस के साथ संयुक्त जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार जांच में सुरक्षा गार्डों की लापरवाही सामने आई है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है। चोरी में इस्तेमाल वाहन और आरोपियों तक पहुंचने के लिए सभी तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
रखी थी 14 तोपे
नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 ऐतिहासिक तोपें रखी थीं। चोरी के बाद अब वहां 13 तोपें ही बची हैं। ये तोपें पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी विशेष मिश्रित धातुओं से बनी हैं तथा इन पर फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख अंकित हैं। ऐतिहासिक महत्व के कारण इनकी कीमत अमूल्य मानी जाती है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय अवैध एंटीक बाजार में इनकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।




